मीटर रीडर अब घर-घर जाकर काटेंगे बिजली का बिल, राजस्व में बढ़ोतरी के साथ जनता को भी होगा फायदा

kapilvastupost 

शोहरतगढ़ ,सिद्धार्थनगर  – बिजली बिलिंग प्रणाली में ठेकेदारी प्रथा एक बड़ी चुनौती बनकर उभर रही है। निजी ठेकेदारों के माध्यम से मीटर रीडिंग और बिल बनाने की प्रक्रिया में कई तरह की समस्याएं सामने आती हैं, जिससे उपभोक्ताओं और बिजली विभाग, दोनों को नुकसान होता है|

ठेकेदारों के कर्मचारी अक्सर जल्दबाजी में या अनुभवहीनता के कारण गलत रीडिंग दर्ज कर देते हैं, जिससे उपभोक्ताओं को गलत बिल मिलते है |  ठेकेदारी प्रणाली में स्थायी कर्मचारियों की तुलना में अस्थायी कर्मचारियों को काम पर रखा जाता है, जो अक्सर प्रशिक्षित नहीं होते, जिससे बिलिंग में गड़बड़ियां होती हैं।

कई बार ठेकेदार और उनके कर्मचारी उपभोक्ताओं से अनौपचारिक रूप से पैसे लेकर बिलिंग में हेरफेर करते हैं, जिससे ईमानदार उपभोक्ता परेशान होते हैं। कई इलाकों में मीटर रीडिंग समय पर नहीं होती, जिससे बिलिंग चक्र प्रभावित होता है और उपभोक्ताओं को भारी भरकम बिल एक साथ चुकाने पड़ते हैं।

बिजली विभाग ने उपभोक्ताओं की सहूलियत और राजस्व बढ़ाने के उद्देश्य से एक नई पहल शुरू की है। अब मीटर रीडर घर-घर जाकर बिजली का बिल काटेंगे, जिससे उपभोक्ताओं को समय पर और सही बिल मिल सकेगा। यह बातें शोहरतगढ़ स्थित परसिया उप विद्द्युत वितरण केंद्र के एस डी ओ विनोद कुमार ने कही उन्होंने बताया कि शोहरतगढ़ कसबे में तीन मीटर रीडर लगाया गए हैं साथ ही तीन व्हाट्सप्प ग्रुप भी पहले से वर्क कर रहे हैं | ग्रामीण क्षेत्र के लिए 6 मीटर रीडर लगाए गए है |

अब उपभोक्ताओं को बिजली बिल के लिए लाइन में लगने की जरूरत नहीं पड़ेगी। बिजली विभाग के मीटर रीडर सीधे उनके घर जाकर बिल जनरेट करेंगे और उपभोक्ता मौके पर ही भुगतान कर सकेंगे। इससे गलत बिलिंग की शिकायतें भी कम होंगी और राजस्व संग्रहण में तेजी आएगी।

उपकेंद्रों पर बुनियादी सुविधाओं की कमी, उपभोक्ता और कर्मचारी हो रहे परेशान

बिजली उपकेंद्रों पर टॉयलेट, पीने के पानी और बैठने की उचित व्यवस्था न होने से उपभोक्ताओं और कर्मचारियों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। कई उपकेंद्रों पर शौचालय की व्यवस्था न होने के कारण कर्मचारियों को बाहर जाने की मजबूरी होती है, जिससे कामकाज प्रभावित होता है।

वहीं, पीने के पानी की अनुपलब्धता से गर्मी और उमस में परेशानी बढ़ जाती है। बैठने के लिए उचित स्थान न होने से कर्मचारी घंटों खड़े रहने को मजबूर होते हैं। बिजली विभाग को इस ओर ध्यान देना चाहिए और सभी उपकेंद्रों पर बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए, ताकि कर्मचारी सुचारू रूप से अपना कार्य कर सकें।