सिद्धार्थनगर में बर्मी बौद्ध मठ की जमीन पर कब्जे का प्रयास, दो पक्षों में विवाद, प्रशासन ने रोका निर्माण

Kapilvastupost

सिद्धार्थनगर। मुख्यालय के स्टेशन रोड स्थित ऐतिहासिक बर्मी बौद्ध विहार मठ एक बार फिर विवादों की चपेट में आ गया है। ताजा मामला मठ की जमीन पर कथित अतिक्रमण से जुड़ा है, जहाँ बुधवार को कुछ लोगों द्वारा मठ की बाउंड्री वाल गिरा दी गई। घटना के बाद मठ के संचालक भंते अलार कलार ने पुलिस और प्रशासन को सूचना दी, जिस पर तत्काल कार्रवाई करते हुए प्रशासन की टीम मौके पर पहुँची और दोनों पक्षों को समझाकर फिलहाल किसी भी प्रकार के नये निर्माण पर रोक लगा दी गई।

विवाद का कारण यह बताया जा रहा है कि एक पक्ष का दावा है कि जिस जमीन को लेकर विवाद है, वह उनके परिवार द्वारा बैनामा के माध्यम से खरीदी गई थी और खतौनी में उनका नाम दर्ज है। इसी आधार पर वे वहां निर्माण कर रहे थे, लेकिन मठ प्रबंधन और स्थानीय लोगों द्वारा उन्हें रोका गया।

वहीं दूसरी ओर, मठ के संचालक भंते अलार कलार ने आरोप लगाया कि मठ की यह जमीन वर्षों पुरानी है और यह धार्मिक सम्पत्ति के अंतर्गत आती है। उनका कहना है कि जिले में स्थित कई बौद्ध मठों की जमीनों पर कुछ प्रभावशाली लोग धीरे-धीरे कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि वे इस जमीन की रक्षा के लिए न सिर्फ प्रशासन बल्कि न्यायालय तक लड़ाई लड़ रहे हैं और शासन से मांग करते हैं कि मठ की जमीन को सुरक्षित रखा जाए और अवैध कब्जों पर सख्त कार्रवाई हो।

यह पहला मामला नहीं है जब बौद्ध मठ की जमीन को लेकर विवाद हुआ हो। इससे पहले भी जिले के कई हिस्सों में बौद्ध धार्मिक स्थलों की जमीनों पर अतिक्रमण की घटनाएं सामने आ चुकी हैं।

इस पूरे प्रकरण में बड़ा सवाल यह है कि धार्मिक स्थलों की जमीनों को लेकर हो रहे लगातार विवाद और कब्जे के मामलों से शासन-प्रशासन कैसे निपटेगा? साथ ही यह देखना होगा कि अदालत का अंतिम फैसला किस पक्ष के हक में आता है, तब तक प्रशासन की निष्पक्षता और सतर्कता ही इस धार्मिक स्थल की सुरक्षा की गारंटी हो सकती है।