​नौगढ़ के आरके सेवा अस्पताल में प्रसूता की मौत: डीएम ने गठित की जांच समिति, अस्पताल बंद कर फरार हुए प्रबंधक और स्टाफ 

हॉस्पिटल का रजिस्ट्रेशन सिर्फ दिखावा मरीजों का इलाज बिना डिग्री वाले करते हैं इलाज

रजिस्ट्रेशन के बाद अस्पताल संचालक बाहर के डॉक्टर से ऑपरेशन के बाद पूरा इलाज और ओपीडी खुद करते हैं।

Kapilvastupost

नौगढ़, 23 सितंबर: नौगढ़ शहर के साड़ी तिराहे पर स्थित आरके सेवा अस्पताल में प्रसूता की मौत के मामले ने स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही को फिर उजागर कर दिया है। इस दुखद घटना के बाद जिला मजिस्ट्रेट (डीएम) डॉ. राजा गणपति आर ने तत्काल एक तीन सदस्यीय जांच समिति का गठन किया है, लेकिन हैरानी की बात यह है कि अस्पताल का प्रबंधन और कर्मचारी जांच शुरू होने से पहले ही फरार हो गए हैं। इस स्थिति ने न केवल जांच को बाधित किया है, बल्कि अस्पताल की घोर लापरवाही और गैर-जिम्मेदारी को भी स्पष्ट रूप से दर्शाया है।

​यह घटना महाराजगंज जिले के कोल्हुई क्षेत्र की 22 वर्षीय सरिता मौर्या के साथ हुई, जिन्हें प्रसव के लिए इस अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 21 सितंबर की शाम को सरिता ने एक बच्चे को जन्म दिया, लेकिन उसके तुरंत बाद उनकी तबीयत बिगड़ गई। आनन-फानन में उन्हें रेफर किया गया, पर तब तक बहुत देर हो चुकी थी। सरिता की मौत की खबर सुनते ही उनके परिजनों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया।

​सीएमओ कार्यालय की मिलीभगत से चल रहे बर्डपुर,शोहरतगढ़ और पकड़ी के अवैध अस्पताल

​आरके सेवा अस्पताल की घटना सिर्फ एक अकेली घटना नहीं है। यह जिले में चल रहे उन सैकड़ों अवैध और बिना मानकों वाले अस्पतालों की कड़ी का हिस्सा है, जिन्हें स्वास्थ्य विभाग की अनदेखी और निष्क्रियता का फायदा मिल रहा है। बर्डपुर , शोहरतगढ़ और पकड़ी जैसे क्षेत्रों में कई ऐसे अस्पताल लाइसेंस की आड़ में बिना चिकित्सकों सुविधाओं के संचालित हो रहे हैं। ये अस्पताल अक्सर गरीब और ग्रामीण मरीजों को निशाना बनाते हैं, जहां वे अनपढ़ और अकुशल कर्मचारियों से इलाज कराकर उनकी जान जोखिम में डालते हैं।

​ये अस्पताल सीएमओ कार्यालय की नाक के नीचे चल रहे हैं और इसके बावजूद कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। यह साफ-साफ बताता है कि स्वास्थ्य विभाग, विशेषकर सीएमओ कार्यालय, इन अवैध गतिविधियों पर आंखें मूंदे हुए है। इन अस्पतालों के खिलाफ कार्रवाई करने की जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग की है, लेकिन ऐसा लगता है कि यह विभाग अपने कर्तव्यों का पालन करने में पूरी तरह विफल रहा है। इस तरह की घटनाओं के बावजूद अगर कोई सख्त कार्रवाई नहीं होती, तो यह साफ है कि भ्रष्टाचार और लापरवाही का यह सिलसिला जारी रहेगा।

​डीएम ने इस मामले में अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. प्रमोद कुमार, सदर एसडीएम कल्याण सिंह मौर्य, और मेडिकल कॉलेज के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ. रेनू गौंड़ को जांच की जिम्मेदारी सौंपी है। उन्हें मंगलवार शाम तक रिपोर्ट देने का निर्देश दिया गया है। लेकिन जब तक स्वास्थ्य विभाग खुद अपनी जिम्मेदारी नहीं समझेगा और इन अवैध अस्पतालों पर लगाम नहीं कसेगा, तब तक सरिता जैसी और भी जानें जाती रहेंगी।