मुस्लिम समाज पर बढ़ते ज़ुल्म को लेकर AIMIM ने राष्ट्रपति को सौंपा ज्ञापन: यूपी सरकार को बर्खास्त करने की मांग
📅 Published on: October 7, 2025
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर, 06 अक्टूबर 2025
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने उत्तर प्रदेश में शासन-प्रशासन द्वारा मुस्लिम समाज पर हो रहे कथित ज़ुल्मों-अत्याचार के विरोध में महामहिम राष्ट्रपति महोदया के नाम एक ज्ञापन जिलाधिकारी महोदय को सौंपा। ज्ञापन में प्रदेश सरकार को बर्खास्त कर राष्ट्रपति शासन लगाए जाने की पुरज़ोर मांग की गई है।
यह ज्ञापन AIMIM सिद्धार्थनगर के जिलाध्यक्ष निशात अली की अध्यक्षता में पार्टी के सभी कार्यकर्ताओं द्वारा दिया गया।
ज्ञापन की मुख्य बातें: ‘लोकतंत्र नहीं, धर्म-विशेष की सरकार’
AIMIM जिलाध्यक्ष निशात अली ने ज्ञापन के माध्यम से कहा कि 2014 से केंद्र में भाजपा सरकार आने के बाद देश में धार्मिक उन्माद और नफ़रत का माहौल बनाया जा रहा है, जिसका भयावह उदाहरण 2017 के बाद से उत्तर प्रदेश में देखा जा सकता है।
पार्टी ने आरोप लगाया कि बीते 8 वर्षों में यूपी में लगातार धर्म के नाम पर उन्माद फैलाकर इस्लाम को मानने वालों पर विभिन्न आरोपों (गौवंश हत्या, दाढ़ी-टोपी, धार्मिक त्योहार, मंदिर-मस्जिद, लव-जिहाद आदि) के तहत जुल्म किए जा रहे हैं।
ज्ञापन में कहा गया है कि तथाकथित गौरक्षकों, बजरंग दल, विहिप, आरएसएस और तमाम अन्य हिन्दू संगठनों द्वारा समय-समय पर नफरत फैलाई जा रही है, जिसमें मॉबलिंचिंग और प्रशासन द्वारा निर्दोषों पर अत्याचार शामिल है।
न्याय का नाम ‘लाठी और बुलडोज़र’
AIMIM ने प्रशासन की कार्रवाई पर कड़ा प्रहार करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश में ऐसा प्रतीत होता है कि न्याय का दूसरा नाम लाठी और बुलडोज़र हो गया है, जो एक लोकतांत्रिक देश के लिए घातक है। पार्टी का आरोप है कि न्यायपालिका का स्थान कार्यपालिका ने ले लिया है।
बरेली की घटना का ज़िक्र: 26 सितंबर 2025 को बरेली में हिंसा रोकने के नाम पर प्रशासन ने इस्लाम को मानने वालों पर बर्बरतापूर्वक लाठियां चलाईं, जिसमें मासूमों, महिलाओं और बुजुर्गों को गंभीर चोटें आईं और उन्हें थानों में शारीरिक प्रताड़ना दी गई।
मुख्यमंत्री के बयान की निंदा: 27 सितंबर 2025 को मुख्यमंत्री द्वारा दिया गया बयान अमर्यादित, अशोभनीय और असंवैधानिक बताया गया, जिसकी पार्टी ने घोर भर्त्सना की।
नफरती संगठनों को संरक्षण का आरोप: ज्ञापन में कहा गया है कि फत्तेपुर और आगरा जैसी जगहों पर भाजपा, बजरंग दल, विहिप, आर.एस.एस. और अन्य हिन्दू संगठनों द्वारा सुनियोजित हिंसा हुई, और करणीसेना ने खुलेआम तलवारें लहराईं, जबकि तमाम धार्मिक गुरु खुलेआम मंचों से नफरती बयानबाजी कर माहौल खराब कर रहे हैं, पर कोई कार्यवाही नहीं की जा रही है।
प्रशासन की मंशा पर सवाल: AIMIM का आरोप है कि शासन-प्रशासन ऐसे नफरती लोगों को संरक्षण दे रहा है, जिससे सरकारी मंशा पर प्रश्न चिन्ह खड़ा होता है।


