📅 Published on: December 23, 2025
Niyamtullah khan
सिद्धार्थनगर। जनपद में उर्वरकों की कालाबाजारी और अवैध बिक्री को रोकने के लिए जिला प्रशासन ने सख्त रुख अपना लिया है। जिलाधिकारी के निर्देश पर हुई छापेमारी में बांसी और मिठवल क्षेत्र की दो बड़ी उर्वरक दुकानों में गंभीर अनियमितताएं पाए जाने पर उनके लाइसेंस तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिए गए हैं।
प्रमुख कार्रवाई: सुल्तान एजेंसी और चौरसिया कृषि केंद्र पर गिरी गाज
प्रशासन द्वारा की गई इस औचक छापेमारी में दो मुख्य प्रतिष्ठानों के खिलाफ दंडात्मक कार्रवाई की गई है।
* सुल्तान एजेंसी (बजारडीह, बांसी): * उपजिलाधिकारी बांसी और सहायक विकास अधिकारी की टीम ने प्रो. अतहर अली के गोदाम की जांच की।
* जांच के दौरान स्टॉक रजिस्टर में दर्ज 1695 बोरी एसएसपी (SSP) में से दो नमूने संदिग्ध पाए गए, जिन्हें सीज कर दिया गया है। भारी अनियमितता मिलने पर दुकान का उर्वरक विक्रय अधिकार पत्र (लाइसेंस) तुरंत निलंबित कर दिया गया।
चौरसिया कृषि विकास केंद्र (मिठवल): उप कृषि निदेशक और जिला कृषि अधिकारी की टीम द्वारा किए गए निरीक्षण में यहाँ भी नियमों की अनदेखी पाई गई, जिसके बाद दुकान का लाइसेंस सस्पेंड कर दिया गया।
अधिकारियों की सख्त चेतावनी: किसानों का शोषण बर्दाश्त नहीं
जिला कृषि अधिकारी मुहम्मद मुजम्मिल ने स्पष्ट किया है कि उर्वरक नियंत्रण आदेश 1985 का उल्लंघन करने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने सभी विक्रेताओं के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं।
निर्धारित मूल्य: उर्वरक की बिक्री केवल सरकार द्वारा तय रेट पर ही की जाए।
टैगिंग पर रोक: किसानों को उर्वरक के साथ कोई अन्य गैर-जरूरी सामग्री (जैसे जबरन जिंक या सल्फर) खरीदने के लिए मजबूर न किया जाए।
पॉश (PoS) मशीन अनिवार्य: प्रत्येक बिक्री का रिकॉर्ड पॉश मशीन में आधार संख्या के साथ दर्ज होना चाहिए।
स्टॉक रजिस्टर: गोदाम में उपलब्ध खाद और रजिस्टर का मिलान सटीक होना चाहिए।
लगातार जारी रहेगी छापेमारी
प्रशासन ने साफ कर दिया है कि यह कार्रवाई केवल शुरुआत है। किसानों के हितों की रक्षा के लिए पूरे जनपद में सहकारी और निजी उर्वरक केंद्रों का निरीक्षण जारी रहेगा। यदि कोई भी विक्रेता अधिक दाम वसूलते या कालाबाजारी करते पाया गया, तो उसके खिलाफ सुसंगत धाराओं में कानूनी कार्रवाई की जाएगी।