📅 Published on: January 1, 2026
गुरु जी की कलम से
सिद्धार्थनगर (शोहरतगढ़): प्रदेश सरकार जहां एक ओर भ्रष्टाचार मुक्त शासन और ‘जीरो टॉलरेंस’ की नीति का ढिंढोरा पीट रही है, वहीं शोहरतगढ़ तहसील में धरातल पर नजारा कुछ और ही है। यहां प्रशासन के जिम्मेदार कर्मचारी ही सरकार की साख पर बट्टा लगा रहे हैं। ताजा मामला एक वायरल वीडियो से जुड़ा है, जिसने तहसील प्रशासन की कार्यशैली को कटघरे में खड़ा कर दिया है।
बिना ‘दक्षिणा’ नहीं हिलती फाइलें
सूत्रों की मानें तो तहसील के इस कार्यालय में ‘सरस्वती’ से ज्यादा ‘लक्ष्मी’ की पूजा होती है। चर्चा है कि यहां बिना सुविधा शुल्क के एक मेज से दूसरी मेज तक फाइल का खिसकना नामुमकिन है। आरोप है कि संबंधित कर्मचारी फाइलों के निस्तारण के बदले खुलेआम ‘दाम’ ऐंठते हैं।
कैमरे में कैद हुई ‘लेन-देन’ की तस्वीर
तहसील परिसर में उस वक्त हड़कंप मच गया जब साहब का पैसा लेते हुए एक वीडियो सामने आया। वीडियो में साहब बड़ी फुर्ती से लक्ष्मी प्राप्ति करते दिख रहे हैं। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि यह पैसा किसी काम के बदले लिया गया है या कोई पुराना लेनदेन है। चर्चाएं यह भी हैं कि शायद साहब किसी को उधार दे रहे थे या पुराना उधार वापस ले रहे थे, लेकिन जनता के बीच चर्चा कुछ और ही कहानी बयां कर रही है।
जांच के घेरे में तहसील प्रशासन
इस घटना ने तहसील प्रशासन की छवि को गहरा धक्का पहुंचाया है। जनता पूछ रही है:
* क्या अधिकारियों की नाक के नीचे चल रहा यह खेल उनकी जानकारी में नहीं है?
* क्या ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ का नारा केवल कागजों और विज्ञापनों तक ही सीमित है?
* वीडियो साक्ष्य होने के बावजूद, क्या प्रशासन केवल ‘जांच’ के नाम पर लीपापोती करेगा या कोई ठोस कार्रवाई होगी?
बड़ा सवाल: अब देखना यह है कि उच्चाधिकारी इस दाग को धोने के लिए क्या कदम उठाते हैं। क्या आरोपी कर्मचारी पर गाज गिरेगी या फिर “बहती गंगा” में सब ऐसे ही डुबकी लगाते रहेंगे? यह तो आने वाला वक्त और प्रशासन की निष्पक्ष जांच ही बताएगी।