सिद्धार्थनगर: आंखों की बीमारियां समय पर इलाज न मिलने के कारण गंभीर रूप दे सकती हैं। इनमें ‘ग्लूकोमा’ यानी काला मोतिया एक ऐसी बीमारी है, जिसे ‘दृष्टि का साइलेंट किलर’ कहा जाता है। हाल ही में सिद्धार्थ नेत्रालय एवं फेको सेन्टर द्वारा जारी एक जागरूकता अभियान में इस बीमारी के गंभीर परिणामों और लक्षणों के प्रति लोगों को सचेत किया गया है।
क्या है ग्लूकोमा?
चिकित्सकों के अनुसार, सामान्य आंख में तरल पदार्थ (एक्वस ह्यूमर) का बहाव संतुलित रहता है। लेकिन ग्लूकोमा की स्थिति में यह तरल पदार्थ आंखों के भीतर जमा होने लगता है, जिससे आंखों के अंदर का दबाव (Pressure) बढ़ जाता है। यह बढ़ा हुआ दबाव ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुँचाता है, जिससे धीरे-धीरे आंखों की रोशनी हमेशा के लिए जा सकती है।
इन लक्षणों को न करें नजरअंदाज
पोस्टर के माध्यम से विशेषज्ञों ने कुछ प्रमुख लक्षणों के प्रति आगाह किया है:
धुंधली दृष्टि:अचानक या धीरे-धीरे कम दिखाई देना।
आंखों और सिर में दर्द: बार-बार होने वाला तेज सिरदर्द।
रोशनी के चारों ओर घेरे: प्रकाश की ओर देखने पर इंद्रधनुषी रंग के घेरे दिखाई देना।
लाल आंखें:बिना किसी कारण के आंखों का लगातार लाल रहना।
विजुअल लॉस: दृष्टि में काले धब्बे दिखना या किनारों से दिखाई देना कम होना (Peripheral Vision Loss)।
समय पर जांच है जरूरी
बढ़नी बाजार स्थित ‘सिद्धार्थ नेत्रालय एवं फेको सेन्टर’ के विशेषज्ञों का कहना है कि यदि इनमें से कोई भी लक्षण महसूस हो, तो तुरंत ग्लूकोमा विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। समय पर पहचान और सही उपचार से आंखों की रोशनी को सुरक्षित रखा जा सकता है।
हेल्पलाइन नंबर: किसी भी आपातकालीन परामर्श के लिए आप 9119889474 या 9358974017 पर संपर्क कर सकते हैं।