दंगल में ‘दंगई’ बोल: डुमरियागंज के पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह का विवादित बयान वायरल, पहलवानों को लेकर कही आपत्तिजनक बात

पूर्व विधायक कौन सी संस्कृति और संस्कारों को आगे बढ़ाना चाहते हैं जो कर रहे हैं क्या वह ईश्वरीय सत्ता के बताए मार्गों के अनुरूप हैं ।

Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले में स्थित डुमरियागंज के पूर्व विधायक और भाजपा नेता राघवेंद्र प्रताप सिंह एक बार फिर अपने तीखे और विवादित तेवरों के कारण सुर्खियों में हैं। राप्ती नदी के तट पर स्थित परशुराम वाटिका में आयोजित ‘राम-राम कुश्ती दंगल’ के दौरान मंच से दिया गया उनका एक बयान सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया है।
क्या है पूरा मामला?
मिली जानकारी के अनुसार, ‘धर्म रक्षा मंच’ के बैनर तले आयोजित इस तीन दिवसीय कुश्ती प्रतियोगिता के आखिरी दिन माहौल तब तनावपूर्ण हो गया जब एक शास्त्री और एक थापा पहलवान के बीच मुकाबले के दौरान बेईमानी के आरोप लगने लगे। देखते ही देखते अखाड़े में अन्य पहलवान भी कूद पड़े और मारपीट शुरू हो गई। हंगामा इतना बढ़ा कि कुछ पहलवान सीधे मंच पर चढ़ गए।
मंच से दी विवादित नसीहत
हंगामा बढ़ता देख आयोजन के संरक्षक और पूर्व विधायक राघवेंद्र प्रताप सिंह ने माइक संभाला। शुरुआत में उन्होंने पहलवानों को समझाने और मंच से नीचे उतरने को कहा, लेकिन जब स्थिति काबू में नहीं आई तो उन्होंने अपना आपा खो दिया। वायरल वीडियो में उन्हें यह कहते सुना जा सकता है— “शास्त्री पहलवान को ऊपर बुलाओ” और फिर सवाल किया— “कौन मुसलमान है?”।
इसके तुरंत बाद उन्होंने पहलवानों का “खतना चेक” कराने जैसी अत्यंत आपत्तिजनक टिप्पणी की। वीडियो में वह डुमरियागंज थाना प्रभारी श्रीप्रकाश यादव और अपने प्रतिनिधि लवकुश ओझा को माइक से तीन बार यह निर्देश देते दिख रहे हैं कि पहलवानों की जांच की जाए।
सोशल मीडिया पर आक्रोश और कार्रवाई की मांग
इस बयान के बाद वहां मौजूद दर्शकों में भारी असहजता और नाराजगी देखी गई। वीडियो वायरल होते ही फेसबुक, एक्स (ट्विटर) और व्हाट्सएप ग्रुपों में तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। सोशल मीडिया यूजर्स का कहना है कि:
* सार्वजनिक मंच से ऐसी भाषा का प्रयोग सामाजिक सौहार्द बिगाड़ने वाला है।
* एक विशेष समुदाय को लक्षित कर दिया गया यह बयान नफरत फैलाने की कोशिश है।
* प्रशासन को इस पर तत्काल संज्ञान लेकर कठोर कार्रवाई करनी चाहिए।
राघवेंद्र प्रताप सिंह का विवादों से पुराना नाता
यह पहली बार नहीं है जब राघवेंद्र प्रताप सिंह अपने बयानों को लेकर घेरे में आए हों। इससे पहले भी वह हिंदू-मुस्लिम ध्रुवीकरण और विवादित टिप्पणियों के कारण कई बार चर्चा में रह चुके हैं। उनकी कार्यशैली हमेशा से ही आक्रामक हिंदुत्व की राजनीति के इर्द-गिर्द रही है, जिससे उनके समर्थकों और विरोधियों के बीच अक्सर वैचारिक टकराव देखने को मिलता है।
फिलहाल, इस मामले में स्थानीय पुलिस या प्रशासन की ओर से किसी आधिकारिक कार्रवाई की पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन राजनीतिक गलियारों में इस बयान को लेकर चर्चाएं तेज हो गई हैं।