सिद्धार्थनगर: बेटियों को ढूंढने के नाम पर ‘खाकी’ ने किया आर्थिक और मानसिक शोषण, महिला ने दरोगा पर लगाए छेड़छाड़ के गंभीर आरोप
📅 Published on: February 4, 2026
हमारी बेटियों को ढूंढने के नाम पर हमसे पैसे खर्च कराए गए और होटल में मेरे साथ गलत व्यवहार किया गया। विरोध करने पर जेल भेजने की धमकी दी गई।राजकुमारी, पीड़िता
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले से एक ऐसा मामला सामने आया है जिसने पुलिसिया कार्यप्रणाली और महिला सुरक्षा के दावों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। डुमरियागंज थाने में तैनात पुलिसकर्मियों पर एक पीड़ित महिला ने न केवल आर्थिक शोषण, बल्कि छेड़छाड़ और मानसिक प्रताड़ना के भी संगीन आरोप लगाए हैं।
क्या है पूरा मामला?
मामला 20 नवंबर 2025 से शुरू होता है, जब डुमरियागंज थाना क्षेत्र की रहने वाली राजकुमारी की दो बेटियाँ अचानक लापता हो गई थीं। महिला का आरोप है कि शुरुआत में स्थानीय पुलिस ने कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई। पुलिस अधीक्षक के हस्तक्षेप के बाद सर्विलांस के जरिए बेटियों की लोकेशन गुजरात और मुंबई में मिली।
‘बेटियाँ मिलीं, पर सिस्टम ने लूटा’
पीड़िता का सबसे चौंकाने वाला आरोप बेटियों की बरामदगी के दौरान हुई यात्रा को लेकर है। महिला के अनुसार:
* आर्थिक शोषण: बेटियों को लेने गुजरात और मुंबई जाने वाली पुलिस टीम का पूरा खर्च (होटल, खाना और यात्रा) पीड़िता से ही भरवाया गया।
* छेड़छाड़ का आरोप: महिला ने प्रार्थना पत्र में सीधे तौर पर सब इंस्पेक्टर अरविंद मौर्य पर आरोप लगाया है कि यात्रा के दौरान होटल में उन्होंने महिला के साथ जोर-जबरदस्ती करने की कोशिश की।
* धमकी और दबाव: विरोध करने पर दरोगा ने उसे फर्जी मुकदमे में फंसाकर जेल भेजने की धमकी दी। साथ ही, जिन युवकों के पास बेटियाँ मिली थीं, उन पर कार्रवाई करने के बजाय महिला और उसकी बेटियों पर गलत बयान देने का दबाव बनाया गया।
जांच की सुस्त रफ्तार
पीड़िता की शिकायत पर पुलिस अधीक्षक के निर्देशानुसार क्षेत्राधिकारी (CO) बांसी के कार्यालय में महिला और उसकी बड़ी बेटी के बयान दर्ज किए जा चुके हैं। हालांकि, बयान दर्ज होने के काफी समय बाद भी आरोपी पुलिसकर्मियों पर अब तक कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं हुई है।
प्रशासन की चुप्पी
इस संवेदनशील मामले पर जब क्षेत्राधिकारी बांसी से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उनसे बात नहीं हो सकी। वहीं, पुलिस अधीक्षक कार्यालय के पीआरओ सेल की ओर से भी अब तक कोई आधिकारिक बयान या प्रतिक्रिया जारी नहीं की गई है।
अब सवाल यह उठता है कि क्या रक्षक ही भक्षक बन गए हैं? और क्या मुख्यमंत्री की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति के तहत इन आरोपी पुलिसकर्मियों पर गाज गिरेगी?
बाइट (Bites):
* राजकुमारी (पीड़िता): घटनाक्रम और दरोगा पर लगाए गए आरोपों का विवरण।
* पीड़िता की बेटी: पुलिस के दबाव और बरामदगी के दौरान हुए व्यवहार की आपबीती।
