📅 Published on: February 4, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के बांसी विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत भवांरी में सरकारी तंत्र की मिलीभगत और सफाई कर्मचारी की हठधर्मिता का अनोखा मामला सामने आया है। यहाँ तैनात सफाई कर्मी बृजलाल की लापरवाही ने गांव को कूड़े के ढेर में तब्दील कर दिया है, लेकिन अधिकारियों की “मेहरबानी” के चलते उन पर कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
महीनों से नहीं हुई सफाई, बजबजा रही हैं नालियां
ग्राम पंचायत भवांरी में महीनों से सफाई न होने के कारण नालियां गंदगी से पट चुकी हैं। गांव के प्राइमरी स्कूल के पास और पंचायत भवन के सामने झाड़ियों का कब्जा है। स्थिति यह है कि गलियों में कूड़ा-करकट जमा होने से राहगीरों का चलना दूभर हो गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि सफाई कर्मी कभी समय पर गांव नहीं आता।
फर्जी पेरोल और सैलरी का खेल
स्थानीय निवासी रितिक श्रीवास्तव का दावा है कि सफाई कर्मी बृजलाल ड्यूटी से गायब रहते हैं। यदि उनसे सुबह 9 से 12 बजे के बीच कार्यस्थल की फोटो मांगी जाए, तो वह कभी उपलब्ध नहीं करा पाते। इसके बावजूद, जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा फर्जी तरीके से उनका पेरोल भरकर वेतन का भुगतान कर दिया जाता है। यह “सांईया भए कोतवाल” वाली कहावत को चरितार्थ कर रहा है।
बीमारियों का साया और प्रशासन की चुप्पी
गंदगी और नालियों में जमा पानी के कारण गांव में डेंगू, मलेरिया और अन्य संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। रितिक श्रीवास्तव ने ब्लॉक स्तर से लेकर जिला स्तर तक कई बार लिखित शिकायतें की हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। हालांकि, जिले के डीपीआरओ ने हाल ही में कई लापरवाह कर्मियों पर गाज गिराई है, लेकिन भवांरी गांव की स्थिति ढाक के तीन पात जैसी ही बनी हुई है।
ग्रामीण अब सवाल उठा रहे हैं कि आखिर किसके संरक्षण में सफाई कर्मी की यह मनमानी चल रही है और जनता को इस नारकीय जीवन से कब मुक्ति मिलेगी?