📅 Published on: February 19, 2026
Niyamtullah khan
सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर स्वास्थ्य विभाग में इन दिनों ‘अंधेर नगरी चौपट राजा’ वाली स्थिति बनी हुई है। जिस अधिकारी पर भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगे, जिसकी पुष्टि खुद जिलाधिकारी की जांच में हुई और जिसके खिलाफ सीएमओ ने खुद मुकदमा दर्ज कराया, उसी ‘दागी’ चेहरे को विभाग ने फिर से मलाईदार पटल सौंप दिया है। इस मेहरबानी ने स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
क्या है पूरा मामला?
सितंबर 2023 में मिठवल ब्लॉक के एएच हॉस्पिटल के पंजीकरण और नवीनीकरण के नाम पर अवैध वसूली का एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ था। इस वीडियो में तत्कालीन नोडल अधिकारी डॉ. एमएम त्रिपाठी, एक अन्य चिकित्सक और फार्मासिस्ट के बीच रुपयों के लेन-देन की स्पष्ट चर्चा थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्कालीन सीएमओ डॉ. विनोद कुमार अग्रवाल ने डॉ. त्रिपाठी समेत अन्य के विरुद्ध मुकदमा दर्ज कराया था और उन्हें पद से हटा दिया गया था।
जांच में दोषी, फिर भी मेहरबानी क्यों?
हैरानी की बात यह है कि तत्कालीन जिलाधिकारी द्वारा कराई गई जांच में आरोपों की पुष्टि भी हो चुकी है और शासन को कार्रवाई के लिए पत्र भी भेजा जा चुका है। बावजूद इसके, वर्तमान सीएमओ डॉ. रजत कुमार चौरसिया ने 23 दिसंबर 2025 को एक आदेश जारी कर डॉ. त्रिपाठी को पुनः ‘नैदानिक स्थापना’ (निजी अस्पताल) का नोडल अधिकारी बना दिया।
> बड़ा सवाल: जब भ्रष्टाचार के आरोप में एफआईआर दर्ज है और जांच में दोष सिद्ध हो चुका है, तो ऐसी कौन सी मजबूरी या ‘जुगाड़’ था कि विभाग को उसी विवादित चेहरे में ही ‘बेहतर संचालन’ की खूबी नजर आई?
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विभाग में रोष, जनता में अफसोस
इस पुनर्नियुक्ति के बाद स्वास्थ्य महकमे में अंदरखाने भारी नाराजगी है। कर्मचारी और अन्य चिकित्सक दबी जुबान में कह रहे हैं कि अगर भ्रष्टाचार के आरोपियों को ही पुरस्कृत किया जाना है, तो फिर नियमों और पारदर्शिता की बात करना बेमानी है। सीएमओ का तर्क है कि शासन स्तर से अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है, इसलिए उन्हें चार्ज दिया गया। लेकिन सवाल यह है कि क्या नैतिकता और शुचिता का विभाग में कोई स्थान नहीं बचा?