आर्थिक तंगी और ईपीएफ संकट: इटवा में ग्राम रोजगार सेवक ने दिया इस्तीफा

Kapilvastupost
इटवा (सिद्धार्थनगर): उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जिले के इटवा ब्लॉक से एक विचलित करने वाली खबर सामने आई है। ग्राम पंचायत बयारी में तैनात ग्राम रोजगार सेवक मनोज कुमार भट्ट ने आर्थिक तंगी और व्यक्तिगत कठिनाइयों का हवाला देते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। यह कदम क्षेत्र में रोजगार सेवकों की दयनीय स्थिति और लंबित ईपीएफ (EPF) अंशदान के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ले आया है।
स्वेच्छा से सेवा मुक्ति की मांग
मनोज कुमार भट्ट ने खंड विकास अधिकारी (BDO) इटवा को अपना आधिकारिक त्यागपत्र सौंप दिया है। पत्र में उन्होंने स्पष्ट किया कि वह वर्तमान में आर्थिक तंगी से जूझ रहे हैं, जिसके कारण उनके लिए अपनी सेवाएं जारी रखना संभव नहीं है। उन्होंने विभाग से आग्रह किया है कि उन्हें तत्काल प्रभाव से सेवा मुक्त किया जाए।
अधिकारियों की प्रतिक्रिया
इस्तीफे के संबंध में बीडीओ इटवा, अनीश मणि पाण्डेय ने बताया कि उन्हें ग्राम रोजगार सेवक का पत्र प्राप्त हो चुका है। उन्होंने कहा, “नियमों के तहत इस त्यागपत्र को अग्रिम कार्रवाई के लिए जिला स्तरीय उच्चाधिकारियों को भेज दिया गया है। वहां से निर्देश प्राप्त होते ही आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।”
ईपीएफ कटौती पर गहराया विवाद
इस इस्तीफे के साथ ही इटवा ब्लॉक में ग्राम रोजगार सेवकों के ईपीएफ अंशदान का मुद्दा भी गरमा गया है। ग्राम रोजगार सेवक संघ के ब्लॉक अध्यक्ष अजय प्रताप मिश्र ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि कई महीनों से कर्मचारियों का ईपीएफ पैसा यूएएन (UAN) खातों में जमा नहीं किया गया है।
मुख्य शिकायतें:
* अटका हुआ पैसा: कर्मचारियों का ईपीएफ अंशदान बीडीओ के खाते में पड़ा है, लेकिन उसे संबंधित खातों में ट्रांसफर नहीं किया जा रहा है।
* अधिकारियों की उदासीनता: संघ का दावा है कि इस संबंध में कई बार शिकायत की गई, लेकिन अब तक कोई समाधान नहीं निकला।
* भविष्य पर संकट: ईपीएफ जमा न होने से कर्मचारी भविष्य निधि से जुड़ी सुविधाओं और लाभों से वंचित हो रहे हैं, जिससे उनमें भारी असंतोष है।

काल्पनिक तस्वीर