📅 Published on: February 27, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थ नगर : नेशनल टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (TFI) के नेतृत्व में टीईटी (शिक्षक पात्रता परीक्षा) की अनिवार्यता के विरोध में शिक्षकों का आंदोलन अब उग्र रूप ले चुका है। गुरुवार को देशभर के विभिन्न शिक्षक संगठनों ने एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद की और जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (BSA) कार्यालय पर जोरदार धरना दिया।
आर-पार की लड़ाई का आह्वान
धरना प्रदर्शन के बाद शिक्षक जुलूस की शक्ल में कलेक्ट्रेट पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री को संबोधित एक ज्ञापन प्रशासन को सौंपा। टीचर्स फेडरेशन ऑफ इंडिया के उपाध्यक्ष राधेरमण त्रिपाठी ने उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा कि सरकार का यह निर्णय पूरी तरह से अव्यवहारिक है। उन्होंने स्पष्ट किया कि टीईटी की अनिवार्यता किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं की जाएगी और अब शिक्षक “आर-पार की लड़ाई” के लिए तैयार हैं।
मान-सम्मान की लड़ाई
महिला शिक्षक संघ की जिलाध्यक्ष सुषमा सिंह ने इस निर्णय को शिक्षकों के आत्मसम्मान से जोड़ते हुए कहा कि लंबे समय से सेवा दे रहे शिक्षकों पर परीक्षा थोपना उनके अनुभव का अपमान है। वहीं, उप्र पूर्व माध्यमिक संघ के रमेश चंद्र मिश्र ने याद दिलाया कि इससे पहले 22 फरवरी को भी शिक्षकों ने व्यापक स्तर पर ट्विटर अभियान चलाकर अपना विरोध दर्ज कराया था, लेकिन सरकार की चुप्पी ने उन्हें सड़क पर उतरने के लिए मजबूर कर दिया है।
प्रमुख नेताओं की मौजूदगी
आंदोलन में इंद्रसेन सिंह ने एकजुटता पर जोर दिया। इस मौके पर कलीमुल्लाह, विनय शुक्ल, आरती शुक्ला, रश्मि जायसवाल, ऋचा अग्रवाल, संजय कन्नौजिया, अनीता, विनीत भाष्कर, जनार्दन यादव, संदीप कुमार, करुणेश मौर्य और मस्तराम चौधरी सहित भारी संख्या में शिक्षक और शिक्षिकाएं उपस्थित रहे।