📅 Published on: February 27, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर: उत्तर प्रदेश में महिला सुरक्षा के बड़े-बड़े दावों के बीच सिद्धार्थनगर के गोल्हौरा थाना क्षेत्र से एक रूह कंपा देने वाली घटना सामने आई है। यहाँ दो नाबालिग बहनों को सिर्फ इसलिए लाठी-डंडों से पीटकर मरणासन्न कर दिया गया क्योंकि उन्होंने मनचले की छेड़खानी का विरोध करने की ‘जुर्रत’ की थी। प्रशासन की विफलता का आलम यह है कि पीड़ित पिता अब पुलिस पर ही तहरीर बदलवाने और मामले को दबाने का गंभीर आरोप लगा रहे हैं।
पूरी घटना: घर के बरामदे में भी सुरक्षित नहीं बेटियां
घटना बुधवार रात करीब 8 बजे की है। पीड़ित पिता के अनुसार, उनकी 11 वर्षीय बेटी घर के बरामदे में अकेली बैठी थी, तभी गांव का दबंग युवक विक्रम वहां पहुंचा और उसके साथ छेड़खानी करने लगा। जब बड़ी बहन अपनी छोटी बहन की चीख सुनकर उसे बचाने पहुंची और विरोध किया, तो आरोपी ने अपना आपा खो दिया।
आरोप है कि आरोपी विक्रम ने अपने परिजनों (माँ, पत्नी व अन्य) के साथ मिलकर दोनों बहनों पर लाठी-डंडों से हमला कर दिया। इस हमले में बड़ी बहन के सिर पर गंभीर चोटें आई हैं। दोनों बहनों को रात में ही संयुक्त चिकित्सालय बांसी में भर्ती कराया गया, जहां उनकी हालत चिंताजनक बनी हुई है।
प्रशासन के दावों पर सवाल: न्याय या लीपापोती?
इस मामले में पुलिस की भूमिका सबसे ज्यादा संदिग्ध नजर आ रही है। पीड़ित पिता का स्पष्ट आरोप है कि जब वे शिकायत लेकर थाने पहुंचे, तो थानाध्यक्ष ने छेड़खानी की तहरीर पर मुकदमा दर्ज करने से साफ मना कर दिया और जबरन दूसरी तहरीर लिखवाई।
हैरानी की बात यह है कि जहाँ परिवार इसे छेड़खानी और जानलेवा हमला बता रहा है, वहीं पुलिस इस जघन्य अपराध को ‘थूकने के विवाद’ जैसा मामूली रंग देने की कोशिश कर रही है। पुलिस का तर्क है कि विवाद दुकान पर थूकने को लेकर हुआ था, जबकि पीड़ित पक्ष का कहना है कि आरोपी नशे की हालत में घर में घुसा और छेड़खानी का विरोध करने पर जान से मारने की धमकी दी।
कैसे और कब थमेगा खौफ का यह सिलसिला?
यह घटना चीख-चीख कर पूछ रही है कि आखिर बेटियां अपने घर के बरामदे में भी सुरक्षित कब होंगी? जब रक्षक ही भक्षक की भाषा बोलने लगें और तहरीर बदलवाने का दबाव बनाएं, तो आम आदमी न्याय की उम्मीद किससे करे? सिद्धार्थनगर की यह घटना प्रशासन के लिए एक बड़ा धब्बा है।