📅 Published on: March 18, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर: नौगढ़ स्थित मैक्स हॉस्पिटल एंड मैटरनिटी सेंटर में 4 मार्च को हुई प्रसूता संगीता (25) की मौत का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है। 12 दिन बीत जाने के बाद भी स्वास्थ्य विभाग की तीन सदस्यीय जांच टीम ने रिपोर्ट दाखिल नहीं की है, जिससे विभाग की मंशा और जांच की निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इस बीच, मृतका के पिता ने जिलाधिकारी को तहरीर देकर अस्पताल प्रबंधन और स्थानीय आशा कार्यकर्ता पर मिलीभगत के सनसनीखेज आरोप लगाए हैं।
“मना करने के बावजूद किया जबरिया ऑपरेशन”
मृतका संगीता के पिता तुलसीराम ने जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर को दी गई अपनी तहरीर में चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि:
* साजिश का आरोप: उनके गांव की आशा कार्यकर्ता शांति देवी, मेडिकल कॉलेज से उनकी बेटी को बहला-फुसलाकर जबरन मैक्स हॉस्पिटल ले गई।
* बिना सहमति सर्जरी: तुलसीराम का आरोप है कि उन्होंने और परिवार ने ऑपरेशन के लिए मना किया था, लेकिन डॉक्टरों ने उनकी बात अनसुनी कर जबरन संगीता का ऑपरेशन कर दिया।
* इलाज में लापरवाही: ऑपरेशन के बाद खून की कमी होने पर जो ब्लड चढ़ाया गया, उसके बाद संगीता की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई।
शव के साथ संवेदनहीनता और पुलिस-प्रशासन पर आरोप
परिजनों का कहना है कि संगीता की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन ने उन्हें गुमराह किया। उन्हें बताया गया कि मरीज को गोरखपुर रेफर किया जा रहा है, लेकिन एम्बुलेंस से सीधे शव उनके घर पहुंचा दिया गया। इतना ही नहीं, पीड़ित पिता का आरोप है कि जब वे न्याय की गुहार लेकर स्थानीय थाने और सीएमओ (CMO) कार्यालय पहुंचे, तो वहां उनकी दरखास्त लेने के बजाय उन्हें भगा दिया गया।
जांच टीम की चुप्पी से उठ रहे सवाल
6 मार्च को गठित तीन सदस्यीय टीम (डॉ. एम.एम. त्रिपाठी, डॉ. अनूप जायसवाल और डॉ. शाहीन खान) को 4 दिनों में रिपोर्ट देनी थी, जो 12 दिन बाद भी ‘लापता’ है। पीड़ित परिवार का आरोप है कि अब उन पर केस वापस लेने के लिए प्रलोभन और धमकियों का दबाव बनाया जा रहा है। सवाल यह उठ रहा है कि क्या यह देरी किसी बड़े रसूखदार को बचाने की कोशिश है?
क्या कहते हैं जिम्मेदार?
मामले में जिला प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग की ओर से आश्वासन दिया गया है कि जांच रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई होगी, लेकिन धरातल पर अब तक किसी भी आरोपी डॉक्टर या अस्पताल प्रबंधन के खिलाफ ठोस कदम नहीं उठाया गया है।