📅 Published on: April 9, 2026
गुरु जी की कलम से
काठमांडू: नेपाल की राजनीति में आए हालिया उबाल के बीच एक बड़ी खबर सामने आई है। नेपाल के पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली और पूर्व गृह मंत्री रमेश लेखक को पुलिस हिरासत से मुक्त कर दिया गया है। काठमांडू पुलिस ने सर्वोच्च अदालत (Supreme Court) के आदेश का अनुपालन करते हुए यह कदम उठाया।
परिवार को सौंपी गई जिम्मेदारी
काठमांडू पुलिस प्रमुख एसपी रमेश थापा द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार, अदालत के निर्देशानुसार ओली को उनकी पत्नी राधिका शाक्य और लेखक को उनकी पत्नी यशोदा लेखक के जिम्मा (संरक्षण) में छोड़ दिया गया है। बता दें कि दोनों नेताओं के परिवारों ने उनकी रिहाई के लिए न्यायालय में बंदी प्रत्यक्षीकरण (Habeas Corpus)याचिका दायर की थी।
रिहाई का कानूनी आधार
सुनवाई के दौरान अदालत ने यह स्पष्ट कर दिया था कि हिरासत के लिए दी गई 5 दिनों की तीसरी रिमांड अवधि समाप्त होने के बाद इन्हें और अधिक समय तक हिरासत में नहीं रखा जा सकता। तदनुसार, नेपाल फौजदारी संहिता 2072 की धारा 15** के प्रावधानों के आधार पर उन्हें रिहा किया गया है।
पृष्ठभूमि: ‘जेन-जी’ आंदोलन और गिरफ्तारी
यह मामला राष्ट्रीय स्वतंत्र पार्टी के वरिष्ठ नेता बालेंद्र शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद शुरू हुआ। नई मंत्रिपरिषद की पहली बैठक में ‘जेन-जी’ (Gen-Z) आंदोलन के दौरान हुए घटनाक्रमों की जांच के लिए गौरी बहादुर कार्की आयोग की रिपोर्ट को तत्काल लागू करने का निर्णय लिया गया था।
इसी आदेश के आलोक में नेपाल पुलिस के आईजी दान बहादुर कार्की और सशस्त्र पुलिस प्रमुख राजू अर्याल के बीच हुए विमर्श के बाद, दोनों दिग्गज नेताओं को वारंट जारी कर गिरफ्तार किया गया था। फिलहाल, अदालत के इस फैसले को ओली और लेखक के समर्थकों के लिए एक बड़ी राहत के रूप में देखा जा रहा है।