📅 Published on: April 18, 2026
Niyamtullah khan
सिद्धार्थनगर।उत्तर प्रदेश के जनपद सिद्धार्थनगर में सरकारी आदेशों को ताक पर रखकर मनमानी करने का एक बड़ा मामला सामने आया है। जिला पंचायत राज अधिकारी (DPRO) द्वारा जारी स्थानांतरण आदेश के 2 बीत जाने के बाद भी न तो पुराने सचिव ने चार्ज छोड़ा और न ही नए सचिव को कार्यभार ग्रहण करने दिया गया। ताज्जुब की बात यह है कि जिस सचिव पर भ्रष्टाचार के आरोप और आरटीआई के तहत जुर्माने लगे हैं, उन्हें ही कथित राजनीतिक दबाव में पुनः उसी क्लस्टर की जिम्मेदारी सौंप दी गई है।
**क्या है पूरा मामला?**
जिला पंचायत राज अधिकारी, सिद्धार्थनगर द्वारा जारी पत्र संख्या **5000/7-पं.अ./स्था.अ./2025-26** (दिनांक 19-02-2026) के अनुसार, विकास खंड नौगढ़ में कार्यरत ग्राम पंचायत अधिकारी **श्री कलीमुज्जफर** का स्थानांतरण विकास खंड बांसी के **क्लस्टर संख्या-4** (जिसमें भवारी, भुजराई, हाटा खास जैसी ग्राम पंचायतें शामिल हैं) में किया गया था।
*आदेश की अवहेलना और ‘दबंगई’ के आरोप**
स्थानीय सूत्रों और प्राप्त जानकारी के अनुसार, बांसी के क्लस्टर में पूर्व से तैनात सचिव **शेष दत्त मिश्रा** ने स्थानांतरण आदेश के बावजूद अपना पद छोड़ने से इनकार कर दिया। आरोप है कि राजनीतिक रसूख और दबंगई के बल पर उन्होंने नए सचिव को चार्ज नहीं लेने दिया।
### **भ्रष्टाचार के आरोपों के बाद भी पुनर्नियुक्ति पर सवाल**
मामले में सबसे चौंकाने वाला मोड़ तब आया जब प्रशासन ने नियमानुसार कार्रवाई करने के बजाय, कथित तौर पर सत्ता पक्ष के दबाव में आकर पुनः शेष दत्त मिश्रा को ही वहां नियुक्त कर दिया।
* **आरटीआई जुर्माना:** बताया जा रहा है कि शेष दत्त मिश्रा पर आरटीआई के तहत सूचना न देने पर दो बार जुर्माना लग चुका है।
* **भ्रष्टाचार की रिकवरी:** भवारी ग्राम पंचायत में हुए कार्यों में भ्रष्टाचार की पुष्टि होने के बाद उनके खिलाफ रिकवरी के आदेश भी आए हैं।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि जिस अधिकारी पर वित्तीय अनियमितताओं के गंभीर आरोप हैं, उसे बार-बार उसी महत्वपूर्ण पद पर क्यों बनाए रखा जा रहा है?
### **जिम्मेदारों का जवाब: “देखकर बताता हूँ”**
जब इस पूरे प्रकरण और आदेशों की हो रही अवहेलना के संबंध में मुख्य विकास अधिकारी (CDO) **बलराम सिंह** से संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो उन्होंने मामले को केवल “देखकर बताने” का हवाला दिया। जिले के आला अधिकारियों का यह ढुलमुल रवैया प्रशासनिक पारदर्शिता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है।
### **प्रमुख सवाल जो प्रशासन को कटघरे में खड़ा करते हैं:**
1. क्या जिले में सरकारी आदेशों से ऊपर व्यक्तिगत रसूख काम कर रहा है?
2. भ्रष्टाचार में संलिप्त और दंडित अधिकारी को महत्वपूर्ण क्लस्टर का प्रभार देना किस नियम के तहत आता है?
3. क्या प्रशासन दोषी अधिकारियों को संरक्षण दे रहा है?
स्थानीय नागरिकों और जागरूक वर्गों ने शासन से मांग की है कि इस पूरे स्थानांतरण और नियुक्ति खेल की उच्च स्तरीय जांच की जाए और आदेशों की अवहेलना करने वाले दोषियों पर कठोर कार्रवाई हो।