📅 Published on: July 18, 2026
गुरु जी की कलम से
**कपिलवस्तु पोस्ट (विशेष रिपोर्ट):** कन्नौज जिले के तालग्राम क्षेत्र से संदिग्ध परिस्थितियों में लापता हुए परिषदीय विद्यालय के शिक्षक राहुल राजपूत मामले में एक चौंकाने वाला मोड़ आया है। पुलिस की तफ्तीश में इस पूरे घटनाक्रम के तार सिद्धार्थनगर जिले के भारत-नेपाल सीमा पर स्थित बढ़नी कस्बे से जुड़ गए हैं। कन्नौज की एसओजी (SOG) टीम ने सिद्धार्थनगर पुलिस के साथ मिलकर बढ़नी में एक बड़ी कार्रवाई करते हुए दो युवकों को हिरासत में लिया है।
**सीओ के सामने आई फिरौती की लाइव कॉल, मांगा 10 लाख का कूपन**
जानकारी के अनुसार, राहुल राजपूत (निवासी कटरा बहसार, तिर्वा) बीते मंगलवार को स्कूल से घर लौटते समय अचानक लापता हो गए थे। पुलिस को उनकी बाइक तो मिल गई थी, लेकिन राहुल का कोई सुराग नहीं लग रहा था।
मामले में मोड़ तब आया जब कन्नौज के क्षेत्राधिकारी (CO) लापता शिक्षक के घर पर परिजनों से पूछताछ कर रहे थे। उसी दौरान राहुल की मां आशा देवी के मोबाइल पर अपहरणकर्ताओं की एक लाइव कॉल आई। फोन करने वाले ने शिक्षक को सुरक्षित छोड़ने के बदले **10 लाख रुपये की फिरौती** मांगी और रकम मंगाने के लिए बकायदा मैसेज पर एक बैंक खाते का विवरण और आईएफएससी (IFSC) कोड भेजा।
**ऑनलाइन गेमिंग का जाल और नेपाल से कनेक्शन**
पुलिस सूत्रों के मुताबिक, जांच में यह भी सामने आया है कि शिक्षक राहुल राजपूत ऑनलाइन गेम खेलने के आदी थे और पिछले कुछ समय से गंभीर आर्थिक तंगी (डिप्रेशन) से जूझ रहे थे।
अपहरणकर्ताओं ने फिरौती की रकम को ठिकाने लगाने के लिए सीमा पार नेपाल के एक नेटवर्क का इस्तेमाल किया। नेपाल के कपिलवस्तु जिले के नेपालगंज के एक व्यक्ति ने नेपाल के ही कृष्णानगर के रहने वाले दीपक नाम के युवक को यह 10 लाख रुपये भारत में किसी खाते के जरिए मंगाने का जिम्मा सौंपा, जिसके बदले दीपक को मोटा कमीशन (सुविधा शुल्क) मिलना था।
**बढ़नी में सीएसपी केंद्र और क्यूआर कोड का खेल**
इस बड़ी रकम को निकालने के लिए नेपाली युवक दीपक ने सिद्धार्थनगर के बढ़नी (वार्ड संख्या सात) में ऑनलाइन और सीएसपी (कस्टमर सर्विस प्वाइंट) केंद्र चलाने वाले संतोष साहू से संपर्क किया।
* संतोष साहू ने दीपक को अपने भाई बृजपाल उर्फ भोथे के बैंक खाते का क्यूआर (QR) कोड दे दिया।
* डिजिटल जांच में सामने आया है कि इस क्यूआर कोड के माध्यम से करीब 40 हजार रुपये ट्रांसफर भी हो चुके थे और बाकी के 10 लाख रुपये मंगाने की तैयारी चल रही थी।
कन्नौज पुलिस ने जब फिरौती के लिए दिए गए उस बैंक खाते की डिजिटल लोकेशन ट्रेस की, तो उसकी लोकेशन सीधे सिद्धार्थनगर के बढ़नी में मिली। इसके बाद कन्नौज एसओजी की टीम ने तुरंत बढ़नी पहुंचकर सीएसपी संचालक संतोष साहू और नेपाली युवक दीपक को दबोच लिया।
**स्थानीय पुलिस पर लापरवाही के आरोप**
इस पूरे घटनाक्रम के बीच स्थानीय ढेबरुआ थाना पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। हिरासत में लिए गए संतोष के पिता घनश्याम साहू का आरोप है कि जब वे अपने बेटों के बारे में जानकारी लेने ढेबरुआ थाने पहुंचे, तो प्रभारी निरीक्षक ने उन्हें टरका दिया और 24 घंटे बाद आने को कहा। इस संबंध में स्थानीय पुलिस के अधिकारी कुछ भी बोलने से कतरा रहे हैं।
**मौजूदा स्थिति:** कन्नौज पुलिस की एसओजी टीम दोनों संदिग्धों (संतोष और दीपक) को हिरासत में लेकर कन्नौज रवाना हो चुकी है, जहां उनसे गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि यह एक बड़ा संगठित गिरोह हो सकता है जो ऑनलाइन गेमिंग, कर्ज और नेपाल सीमा का फायदा उठाकर वित्तीय धोखाधड़ी या अपहरण जैसी घटनाओं को अंजाम दे रहा है। जांच पूरी होने के बाद ही शिक्षक की बरामदगी और आरोपियों की सीधी संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि हो पाएगी।