रामपुर जौहर यूनिवर्सिटी ध्वस्तीकरण मामला: मजलिस ने DM के माध्यम से राष्ट्रपति और मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन

Kapilvastupost
**सिद्धार्थनगर।**
रामपुर स्थित मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय में चल रही और प्रस्तावित ध्वस्तीकरण की कार्रवाई के विरोध में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने आवाज बुलंद की है। मजलिस के सिद्धार्थनगर जिला अध्यक्ष निशात अली की अध्यक्षता में पार्टी कार्यकर्ताओं ने जिलाधिकारी कार्यालय पहुंचकर जिलाधिकारी के माध्यम से महामहिम राष्ट्रपति महोदया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री को एक ज्ञापन सौंपा।
ज्ञापन के माध्यम से मजलिस ने विश्वविद्यालय को बचाने और हजारों छात्रों के भविष्य को अंधकार में डूबने से रोकने की पुरजोर मांग की है।
“हजारों गरीब और ग्रामीण छात्रों का भविष्य दांव पर”
जिलाधिकारी कार्यालय पर प्रदर्शन के दौरान मजलिस के जिला अध्यक्ष निशात अली ने कहा कि मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर उत्तर प्रदेश का एक बेहद महत्वपूर्ण उच्च शिक्षण संस्थान है। इस यूनिवर्सिटी में हजारों छात्र-छात्राएं पढ़ाई कर रहे हैं, जिनमें से अधिकांश गरीब, मध्यम वर्ग और ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं। प्रशासनिक या ध्वस्तीकरण की किसी भी कार्रवाई से इन विद्यार्थियों की शिक्षा, उनका करियर और संस्थान का शैक्षणिक माहौल बुरी तरह प्रभावित होगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि राष्ट्र निर्माण और सामाजिक विकास के लिए शिक्षण संस्थानों का संरक्षण बेहद जरूरी है।
संवैधानिक अधिकारों का दिया हवाला
ज्ञापन में भारतीय संविधान के अनुच्छेदों का हवाला देते हुए कहा गया कि अनुच्छेद 21 के तहत गरिमापूर्ण जीवन के अधिकार में शिक्षा को एक महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। इसके अलावा अनुच्छेद 21A शिक्षा के महत्व को संवैधानिक मान्यता देता है, जबकि अनुच्छेद 41 और 46 राज्य को कमजोर वर्गों के शैक्षिक हितों के संरक्षण का निर्देश देते हैं। मजलिस ने मांग की कि किसी भी प्रशासनिक कार्रवाई में कानून के पालन के साथ-साथ ‘प्राकृतिक न्याय के सिद्धांत’ (Principles of Natural Justice) का भी ध्यान रखा जाना चाहिए, ताकि छात्रों की पढ़ाई बाधित न हो।
मजलिस ने ज्ञापन में की ये 5 प्रमुख मांगें:
1. **कार्रवाई पर तत्काल रोक:** मोहम्मद अली जौहर विश्वविद्यालय, रामपुर के संबंध में प्रस्तावित या चल रही ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर तुरंत रोक लगाने के निर्देश जारी किए जाएं।
2. **छात्रों के हितों की सुरक्षा:** किसी भी कानूनी या प्रशासनिक कदम से पहले विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों और उनके भविष्य की सुरक्षा पूरी तरह सुनिश्चित की जाए।
3. **विधिसम्मत समाधान:** यदि विश्वविद्यालय के निर्माण या तकनीकी पहलुओं में कोई कानूनी कमी है, तो उसका समाधान कानून के दायरे में रहकर किया जाए, न कि तोड़फोड़ के जरिए।
4. **उच्चस्तरीय निष्पक्ष जांच:** इस पूरे मामले की एक उच्चस्तरीय और निष्पक्ष जांच कराई जाए, जिससे कानून का सम्मान भी बना रहे और शिक्षा का यह बड़ा केंद्र भी सुरक्षित रहे।
5. **संवैधानिक प्रमुखों तक पहुंचे बात:** इस जनहित और शिक्षा हित से जुड़े ज्ञापन को तुरंत माननीय राष्ट्रपति महोदया और उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री तक आवश्यक विचारार्थ भेजा जाए।
प्रदर्शन में ये लोग रहे मौजूद
इस अवसर पर मजलिस के नेताओं ने उम्मीद जताई कि सरकार और प्रशासन संवैधानिक मूल्यों व छात्र हित को ध्यान में रखते हुए न्यायोचित निर्णय लेंगे।
ज्ञापन सौंपने के दौरान मुख्य रूप से मेराज चौधरी, नईम अख्तर अंसारी, हिदायतुल्लाह शमसी, अब्दुल अजीम अज्जू, शम्स तबरेज, रिजवान खान, डॉ. ओबैदुल्लाह हाश्मी, तनवीर अहमद खान, आतिफ अख्तर, शमसुद्दीन, अनस खान, जावेद अंसारी, नियाज अहमद, खालिद खान, अब्दुस्सलाम, जैनुल्लाह, मोहम्मद याकूब और नईम सहित भारी संख्या में पार्टी कार्यकर्ता और पदाधिकारी उपस्थित रहे।