📅 Published on: July 21, 2026
Nizam Ansari
**सिद्धार्थनगर।**
लाखों की आबादी को सुगम आवागमन का सपना दिखाकर बनाए गए रेलवे अंडरपास अब आम जनता के लिए जी का जंजाल बनते जा रहे हैं। सिद्धार्थनगर जिले के **कोलहूवा महरिया रेलवे अंडरपास** में करोड़ों रुपये का बजट खपने के बावजूद पानी के रिसाव की समस्या खत्म होने का नाम नहीं ले रही है। आलम यह है कि बिना भारी बारिश के भी अंडरपास में लगातार पानी भर रहा है, जिससे राहगीरों और स्थानीय ग्रामीणों को जान-जोखिम में डालकर आवाजाही करनी पड़ रही है।
जल निकासी का इंतजाम न होना पड़ा भारी
स्थानीय निवासियों का आरोप है कि निर्माण कार्य के दौरान रेलवे और कार्यदायी संस्था द्वारा जल निकासी (Drainage System) की कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई। इसी लापरवाही का नतीजा है कि दीवार और छत से लगातार पानी का रिसाव हो रहा है। हल्की बारिश होते ही अंडरपास किसी तलाब जैसा नजारा पेश करने लगता है।
दोपहिया और चारपहिया वाहन चालक बेबस
जलभराव के कारण दोपहिया वाहन चालकों का संतुलन बिगड़ने का डर बना रहता है, वहीं कई चारपहिया वाहन पानी में बंद हो जाते हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि अंडरपास बनने से पहले उन्हें उम्मीद थी कि फाटक बंद होने की समस्या से निजात मिलेगी, लेकिन अब जलभराव के कारण उन्हें किलोमीटरों का अतिरिक्त चक्कर काटना पड़ रहा है।
करोड़ों की लागत पर उठे सवाल
बताया जा रहा है कि जिले में इस तरह के प्रत्येक रेलवे अंडरपास के निर्माण पर **₹6 करोड़ से अधिक** का खर्च आया है। जनता के टैक्स का गाढ़ा पैसा पानी की तरह बहाने के बाद भी अगर बुनियादी सुविधाएं दुरुस्त नहीं हैं, तो यह सीधे तौर पर योजना की गुणवत्ता और मॉनिटरिंग पर बड़े सवाल खड़े करता है।
ग्रामीणों ने प्रशासन और रेलवे विभाग से मांग की है कि जल्द से जल्द पंपिंग सेट लगाकर पानी निकाला जाए और रिसाव को रोकने के लिए पक्का तकनीकी समाधान किया जाए, ताकि लोगों को इस रोज-रोज की मुसीबत से राहत मिल सके।