बाणगंगा नदी के तांडव से खतरे में एप्रोच मार्ग: कटान से गिरा बिजली का पोल, तीन गांवों में अंधेरा
📅 Published on: July 21, 2026
गुरु जी की कलम से
बसहिया , शोहरतगढ़ :
मानसून की शुरुआत के साथ ही बाणगंगा नदी का विकराल रूप ग्रामीणों के लिए आफत बन गया है। ग्राम पंचायत बसहिया टोला (नौडीहवा) में बाणगंगा नदी पर बने पुल के उत्तर की तरफ भीषण कटान शुरू हो गया है। आज नदी के तेज बहाव में एक मुख्य विद्युत पोल उखड़कर नदी में समा गया, जिससे क्षेत्र के लगभग 1700 से 1800 की आबादी वाले तीन गांवों की बिजली आपूर्ति पूरी तरह से ठप हो गई है। ग्रामीण इस समय भारी गर्मी और भीषण अंधेरे में रात बिताने को मजबूर हैं।
कई वर्षों से जारी है कटान का सिलसिला
स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, नदी का यह कटान पिछले कई सालों से लगातार हो रहा है। रामगढ़-नौडीहवा क्षेत्र में जब भी बाढ़ का पानी बढ़ता है, कटान और तीव्र हो जाता है। वर्ष 2022 और 2024 में आई भीषण बाढ़ में भी कटान के कारण कई ग्रामीणों के आशियाने और मकान नदी में बह गए थे।
बीते दो दिनों से हो रही मूसलाधार बारिश ने इस बार बरसात की शुरुआत में ही नदी का जलस्तर बढ़ने से स्थिति फिर बेकाबू होती दिख रही है। कटान यदि इसी रफ्तार से जारी रहा तो पुल के एप्रोच मार्ग को भी गंभीर नुकसान पहुँच सकता है।
शासन-प्रशासन से गुहार
स्थानीय निवासी राजेंद्र कुमार यादव और क्षेत्र के ग्रामीणों ने शासन-प्रशासन से अत्यंत संवेदनशील स्थिति को देखते हुए तुरंत हस्तक्षेप की माँग की है।
**ग्रामीणों की प्रमुख माँगें:**
**तत्काल राहत:** गिरे हुए विद्युत पोल को पुनः स्थापित कर तीन गांवों की बिजली आपूर्ति बहाल की जाए।
**स्थायी समाधान:** बाणगंगा नदी के किनारे पुल के एप्रोच को बचाने और कटान को रोकने के लिए अविलंब **पत्थर का ठोकर (Pitched Revetment / Boulder Spur)** लगाया जाए।
ग्रामीणों ने शासन से करबद्ध निवेदन किया है कि बाढ़ के रौद्र रूप धारण करने से पहले समय रहते ठोस कदम उठाए जाएं, ताकि किसी भी बड़े हादसे और आर्थिक-जन धन के नुकसान को रोका जा सके।
वर्ष 2024 के कटान का फोटो


