दिमाग और रीढ़ की बीमारियों को नजरअंदाज न करें, समय पर इलाज से बच सकती है जिंदगी – न्यूरो सर्जन डॉ वरदान पांडेय

मस्तिष्क और रीढ़ की हड्डी हमारे शरीर का वह केंद्रीय नियंत्रण प्रणाली (Central Nervous System) हैं, जिसके बिना जीवन की कल्पना भी असंभव है। बदलती जीवनशैली, गलत पोस्चर, तनाव और दुर्घटनाओं के कारण आज न्यूरोलॉजिकल बीमारियों के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

कपिलवस्तु पोस्ट के लोकप्रिय स्तंभ “Doctor of the Month” की इस विशेष कड़ी में आज हमारे साथ मौजूद हैं जनपद के प्रसिद्ध VPL हॉस्पिटल के वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. वरदान पांडेय जी। डॉ. पांडेय ने ब्रेन, स्पाइन, स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर और आधुनिक न्यूरोसर्जरी से जुड़े आम लोगों के महत्वपूर्ण सवालों के अत्यंत सरल और सटीक जवाब दिए हैं। आइए पढ़ते हैं यह पूरी बातचीत:

निज़ाम अंसारी 

डॉक्टर साहब, सबसे पहले हमारे पाठकों को बताएं कि एक न्यूरोसर्जन का मूल कार्य क्या होता है?

डॉ. वरदान पांडेय: न्यूरोसर्जन का मुख्य कार्य मस्तिष्क (Brain), रीढ़ की हड्डी (Spine), नसों और पूरे तंत्रिका तंत्र से जुड़ी जटिल बीमारियों का सटीक निदान, उपचार और आवश्यकता पड़ने पर सर्जरी करना होता है। हमारा प्राथमिक उद्देश्य मरीज को सुरक्षित रखना और उसे एक बेहतर व सामान्य जीवन की ओर वापस लाना होता है।

डॉक्टर साहब आजकल आपके पास किस प्रकार की न्यूरो संबंधी समस्याएं सबसे ज्यादा आ रही हैं?

डॉ. वरदान पांडेय: आज के दौर में ब्रेन स्ट्रोक, ब्रेन ट्यूमर, रीढ़ की डिस्क की समस्या (जैसे स्लिप डिस्क), गर्दन और कमर दर्द, नस दबना, सिर में गंभीर चोट (Head Injury) और स्पाइनल इंजरी के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। इसका मुख्य कारण हमारी बदलती जीवनशैली, शारीरिक गतिविधियों की कमी और समय पर इलाज न कराना है।

ब्रेन ट्यूमर एक डरावना नाम लगता है। इसके शुरुआती लक्षण क्या होते हैं, जिन्हें देखकर सतर्क हो जाना चाहिए?

डॉ. वरदान पांडेय ने बताया ब्रेन ट्यूमर के कुछ प्रमुख शुरुआती लक्षण हैं: बार-बार या लगातार तेज सिरदर्द होना। बिना किसी स्पष्ट कारण के उल्टी होना। अचानक दौरे (Fits/Seizures) पड़ना।

शरीर के किसी एक हिस्से या हाथ-पैर में कमजोरी महसूस होना।आंखों की रोशनी अचानक कम होना या धुंधला दिखना। स्वभाव या व्यवहार में अचानक बदलाव आना।

यदि ऐसे लक्षण दिखें, तो बिना देरी किए विशेषज्ञ न्यूरोसर्जन से सलाह लेनी चाहिए।

ब्रेन स्ट्रोक (पैरालिसिस) के मामले भी बहुत आ रहे हैं। इसमें समय की क्या भूमिका है?

डॉ. वरदान पांडेय के अनुसार स्ट्रोक के मामले में ‘हर मिनट कीमती’ होता है। यदि अचानक चेहरा एक तरफ टेढ़ा हो जाए, एक हाथ या पैर में कमजोरी आ जाए, बोलने में तुतलाहट हो या समझ न आए, तो इसे तुरंत स्ट्रोक मानना चाहिए। मरीज को तुरंत ऐसे अस्पताल ले जाना चाहिए जहाँ न्यूरो की व्यवस्था हो। यदि शुरुआती 3 से 4 घंटे (Golden Hour) के भीतर इलाज शुरू हो जाए, तो मरीज को स्थायी अपंगता या मौत के खतरे से बचाया जा सकता है।

डॉक्टर साहब एक्सीडेंट या सिर की चोट के बाद किन संकेतों को अत्यंत गंभीर मानना चाहिए?

डॉ. वरदान पांडेय ने बताया सिर में चोट लगने के बाद अगर मरीज बेहोश हो जाए, बार-बार उल्टी करे, दौरे पड़ें, नाक या कान से खून या साफ पानी जैसा द्रव निकले, अत्यधिक नींद आए या व्यवहार में अजीब बदलाव दिखे—तो इसे बेहद गंभीर मानना चाहिए और तुरंत इमरजेंसी में ले जाना चाहिए।

रिपोर्टर : लोगों में डर रहता है कि न्यूरोसर्जन के पास जाने का मतलब सर्जरी ही है। क्या हर बीमारी में ऑपरेशन जरूरी होता है?

डॉ. वरदान पांडेय का कहना है यह एक बड़ा भ्रम है। लगभग 80 से 90 प्रतिशत मरीज दवाओं, सही फिजियोथेरेपी और जीवनशैली में बदलाव से ही ठीक हो जाते हैं। न्यूरोसर्जरी अंतिम विकल्प होती है और ऑपरेशन तभी किया जाता है जब दवाएं काम न कर रही हों या मरीज की जान को खतरा हो।

कपिलवस्तु पोस्ट: आधुनिक न्यूरोसर्जरी कितनी सुरक्षित हो चुकी है?

देखिये आज कल आधुनिक मेडिकल साइंस ने न्यूरोसर्जरी को बेहद सुरक्षित बना दिया है। आज हमारे पास माइक्रोस्कोपिक सर्जरी, एंडोस्कोपिक तकनीक, हाई-रिजोल्यूशन इमेजिंग और एडवांस्ड एनेस्थीसिया उपलब्ध है। इससे बड़े से बड़े ऑपरेशन बेहद छोटे चीरे के साथ, कम से कम रक्तस्राव और बिना किसी बड़े जोखिम के सफलतापूर्वक संपन्न किए जा रहे हैं।

कपिलवस्तु पोस्ट: आजकल लोग घंटों मोबाइल और कंप्यूटर पर बिताते हैं, इसका स्पाइन पर क्या असर पड़ रहा है?

डॉ. वरदान पांडेय कहते हैं लंबे समय तक गर्दन झुकाकर मोबाइल चलाना या गलत पोस्चर में कंप्यूटर पर बैठने से रीढ़ की हड्डी और गर्दन की नसों पर भारी दबाव पड़ता है। इससे सर्वाइकल, स्लिप डिस्क और कमर दर्द की समस्याएं युवाओं में तेजी से बढ़ रही हैं। काम के दौरान हर 30-40 मिनट में ब्रेक लें, पोस्चर सही रखें और नियमित रूप से स्ट्रेचिंग करें।

कपिलवस्तु पोस्ट: अपने मस्तिष्क और रीढ़ को स्वस्थ रखने के लिए आम लोगों को क्या करना चाहिए?

डॉ. वरदान पांडेय बताते हैं कुछ आसान आदतें अपनाकर आप स्वस्थ रह सकते हैं: नियमित व्यायाम: रोजाना 30 मिनट वॉक या योग करें। ब्लड प्रेशर और डायबिटीज को हमेशा कंट्रोल में रखें।बाइक चलाते समय हेलमेट और कार में सीट बेल्ट जरूर लगाएं।संतुलित भोजन लें और धूम्रपान व नशे से पूरी तरह दूर रहें।

कपिलवस्तु पोस्ट: न्यूरोसर्जरी को लेकर समाज में सबसे बड़ा भ्रम क्या है?

डॉ. वरदान पांडेय बताते हैं कि सबसे बड़ा भ्रम यह है कि ‘ब्रेन या स्पाइन सर्जरी कराने से मरीज जीवन भर के लिए अपाहिज हो जाता है या जान चली जाती है’। यह पूरी तरह गलत है। समय पर सही पहचान, आधुनिक तकनीक और अनुभवी सर्जिकल टीम की मदद से आज अधिकांश मरीज सफल ऑपरेशन के बाद एक सामान्य और सक्रिय जीवन जी रहे हैं।

कपिलवस्तु पोस्ट: अंत में, हमारे पाठकों के लिए आपका क्या संदेश है?

पाठकों के लिए मेरा संदेश यही है कि बीमारी को छिपाएं नहीं और लक्षणों को मामूली समझकर नजरअंदाज न करें। न्यूरो संबंधी समस्याओं में ‘समय’ ही सबसे बड़ा इलाज है। स्वस्थ जीवनशैली अपनाएं और कोई भी समस्या होने पर योग्य विशेषज्ञ से संपर्क करें।

न्यूरोसर्जरी केवल एक चिकित्सा प्रक्रिया नहीं, बल्कि सही समय पर लिए गए सही निर्णय का विज्ञान है। डॉ. वरदान पांडेय से हुई इस खास बातचीत से यह स्पष्ट है कि जागरूकता और त्वरित उपचार से गंभीर से गंभीर न्यूरोलॉजिकल समस्याओं पर विजय पाई जा सकती है।

इस अंक के हमारे खास मेहमान जनपद के प्रसिद्ध VPL हॉस्पिटल में अपनी सेवाएं दे रहे वरिष्ठ न्यूरोसर्जन डॉ. वरदान पांडेय जी थे।