📅 Published on: August 25, 2026
Kapilvastupost
सिद्धार्थनगर/मोहाना। फिल्मों या चुटकुलों में डॉक्टर द्वारा पेट में कैंची या तौलिया भूल जाने की बातें अक्सर सुनने को मिलती हैं, लेकिन सिद्धार्थनगर जिले के मोहाना थाना क्षेत्र में एक ऐसा ही हैरान करने वाला असल मामला सामने आया है। बर्डपुर चौराहे पर स्थित विद्या अस्पताल के डॉक्टर ने मरीज के पेट दर्द के ऑपरेशन के दौरान पेट के अंदर ही ‘डीजे स्टेंट’ (डबल जे स्टेंट) छोड़ दिया।
दूसरे अस्पताल में जांच के बाद हुआ बड़ा खुलासा चिल्हिया थाना क्षेत्र के अलीदापुर निवासी शिकायतकर्ता पंकज चौबे ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उनके गांव के रमेश पटवा (पुत्र स्व. कृपानाथ पटवा) को 03 जुलाई 2026 को पेट में तेज दर्द हुआ था। इसके बाद परिजन उन्हें विद्या अस्पताल बर्डपुर ले गए, जहां डॉक्टर ने उनका ऑपरेशन किया।
ऑपरेशन के बाद भी जब मरीज की स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ और पेशाब से खून आने लगा, तो परिजन उन्हें दूसरे अस्पताल (वीपीएल अस्पताल) ले गए। वहां जांच के दौरान पता चला कि मरीज के पेट में एक डीजे स्टेंट (मूत्र मार्ग की रुकावट दूर करने वाली प्लास्टिक की नली) छूटा हुआ है।
अस्पताल संचालक पर धमकी देने का आरोप गड़बड़ी की जानकारी मिलने पर जब ग्रामीण और तीमारदार विद्या अस्पताल पहुंचे, तो वहां डॉक्टर मौजूद नहीं थे। शिकायतकर्ता पंकज चौबे का आरोप है कि रविवार (23 अगस्त) शाम 6 बजे विद्या अस्पताल के संचालक अजय यादव ने फोन कर ग्रामीणों के सामने उन्हें हाथ-पैर तोड़ने और जान से मारने की धमकी दी। इस बातचीत की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी ग्रामीणों के पास मौजूद है।
पुलिस ने दर्ज किया मुकदमा पीड़ित पक्ष द्वारा मोहाना थाने में दी गई तहरीर के आधार पर पुलिस ने अस्पताल संचालक अजय यादव के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 125, 351(3) और 352 के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। शिकायतकर्ता ने पुलिस को बताया कि यदि उनके या उनके परिवार के साथ कोई अनहोनी होती है, तो इसके जिम्मेदार अस्पताल संचालक अजय यादव होंगे।
डीजे स्टेंट विवाद में विद्या अस्पताल के संचालक अजय यादव की सफाई: बोले- ‘कोई लापरवाही नहीं हुई, साजिश के तहत फैलाया जा रहा भ्रम’
सिद्धार्थनगर। बर्डपुर स्थित विद्या अस्पताल पर मरीज के पेट में ‘डीजे स्टेंट’ छोड़ने के लगे आरोपों पर अस्पताल संचालक अजय यादव की ओर से कड़ा पक्ष सामने आया है। अजय यादव ने आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए इसे अस्पताल और उनकी छवि को धूमिल करने की सोची-समझी साजिश करार दिया है।
‘चिकित्सीय प्रक्रिया के तहत दूसरा स्टेंट नहीं निकाला गया’
मामले पर अपना रुख स्पष्ट करते हुए अजय यादव ने कहा कि इलाज में किसी तरह की चिकित्सीय लापरवाही नहीं हुई है। मरीज के इलाज के दौरान दो ‘डीजे स्टेंट’ डाले गए थे। इलाज के बाद प्रक्रिया के तहत एक स्टेंट निकाल दिया गया था, जबकि मरीज के गुर्दे (किडनी) में सूजन होने के कारण चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार दूसरे स्टेंट को उस समय नहीं निकाला गया था।
पुलिस की जल्दबाज़ी और प्रक्रिया पर उठाए सवाल
अजय यादव ने पुलिस कार्रवाई की प्रक्रिया पर सवाल खड़े करते हुए कहा कि खुद मरीज रमेश पटवा की ओर से कोई तहरीर या शिकायती पत्र नहीं दिया गया है, बल्कि किसी अन्य बाहरी व्यक्ति द्वारा यह शिकायत दर्ज कराई गई है। थाना मोहाना पुलिस को मुकदमा दर्ज करने से पहले स्वास्थ्य विभाग के उच्च अधिकारियों और विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम से जांच करानी चाहिए थी। यदि विभागीय जांच में लापरवाही की बात सामने आती, तब कानूनी कार्रवाई करना उचित होता। लेकिन बिना किसी जांच-पड़ताल के महज दो घंटे के भीतर मुकदमा दर्ज कर दिया गया।
सोशल मीडिया पर साजिश का आरोप
संचालक अजय यादव का कहना है कि उन्हें और उनके अस्पताल को बदनाम करने की नीयत से सोशल मीडिया पर भ्रामक वीडियो चलाकर लगातार साजिश रची जा रही है। उन्होंने कहा कि वे स्वास्थ्य विभाग की किसी भी निष्पक्ष जांच का सामना करने को तैयार हैं, जिससे दूध का दूध और पानी का पानी हो सके।