माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज: नेटवर्क का बहाना बनाकर मरीजों से उगाही, संविदाकर्मी की मनमानी से बेबस मरीज

Kapilvastupost

सिद्धार्थनगर। जिला मुख्यालय स्थित माधव प्रसाद त्रिपाठी मेडिकल कॉलेज एक बार फिर अपने कर्मचारियों के कारनामों को लेकर सुर्खियों में है। इस बार कॉलेज के एक चर्चित संविदाकर्मी पर मरीजों का आर्थिक शोषण करने और उनसे ‘सुविधा शुल्क’ वसूलने के बेहद गंभीर आरोप लगे हैं। उच्चाधिकारियों के लगातार दौरों के बावजूद स्वास्थ्य परिसर में दलाली और मनमानी का यह खेल धड़ल्ले से जारी है।

जांच के नाम पर फर्जी ‘नेटवर्क प्रॉब्लम’ का खेल चिकित्सकों द्वारा खून की जांच लिखे जाने के बाद जब लाचार मरीज रजिस्ट्रेशन काउंटर पर पहुँचते हैं, तो संविदाकर्मी उमेश का पुराना पैंतरा शुरू होता है। मरीजों का आरोप है कि काउंटर पर बैठते ही वह पहला ही तीर चलाता है—”नेटवर्क गायब है, दो घंटे बाद आना।”

दूर-दराज से आए बेबस मरीज दो घंटे तक दर्द और लाचारी में इंतजार करते हैं। जब दोबारा काउंटर पर जाते हैं, तो संविदाकर्मी वही रटा-रटाया राग अलापता है कि “साइट नहीं चल रही है, लेकिन अगर अर्जेंट है तो बताओ… कोई ‘जुगाड़’ बिठाएं?”

‘सुविधा शुल्क’ दो और तत्काल रजिस्ट्रेशन पाओ जैसे ही बेबस मरीज उसकी बातों के जाल में फँसते हैं और अपनी मजबूरी का सौदा करने को तैयार होते हैं, तथाकथित ‘नेटवर्क की खराबी’ अचानक ठीक हो जाती है। जेब ढीली करते ही तत्काल रजिस्ट्रेशन की पर्ची थमा दी जाती है। जो मरीज इस अवैध वसूली का विरोध करते हैं, उनके साथ तू-तू-मैं-मैं की जाती है और अंततः उन्हें बिना जांच कराए या अपमानित होकर लौटना पड़ता है।

अधिकारियों की अनदेखी पर उठ रहे सवाल कलेक्टर और जिले के जनप्रतिनिधि आए दिन मेडिकल कॉलेज का जायजा लेते हैं, फिर भी एक संविदाकर्मी की यह हिम्मत कि वह खुलेआम डाका डाल रहा है? अस्पताल में मरीजों का दुख-दर्द सुनने वाला कोई जिम्मेदार अधिकारी मौजूद नहीं दिखता। अगर उच्चाधिकारियों ने इस चर्चित संविदाकर्मी के कारनामों की निष्पक्ष जांच कराई, तो उस पर गाज गिरना तय माना जा रहा है।