गंगा-जमुनी तहज़ीब की मिसाल: सिद्धार्थनगर में मुस्लिम परिवार ने आयोजित किया माता रानी का विशाल भंडारा, उमड़े हज़ारों श्रद्धालु

​”मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना, इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है। 

मन्नान भाई ने नवरात्र के पावन अवसर पर भंडारा लगाकर यह साबित कर दिया, 

कि सिद्धार्थनगर की गंगा-जमुनी तहज़ीब आज भी अटूट और अनूठी है। 

सौहार्द और भाईचारे का यह पावन संदेश समाज को हमेशा जोड़े रखेगा।”

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सिद्धार्थनगर। धर्म, आस्था और इंसानियत जब एक साथ नज़र आते हैं, तो समाज में आपसी प्रेम और भाईचारे की एक बेहद ख़ूबसूरत तस्वीर उभरती है। सिद्धार्थनगर जिला मुख्यालय पर शारदीय नवरात्र के पावन अवसर पर ऐसी ही एक प्रेरणादायक मिसाल देखने को मिली, जहाँ एक मुस्लिम परिवार ने मां दुर्गा के भक्तों के लिए विशाल भंडारे का आयोजन कर सांप्रदायिक सौहार्द, सामाजिक एकता और मानवता का अनूठा संदेश दिया। इस पहल ने एक बार फिर साबित कर दिया कि सेवा और इंसानियत का कोई मजहब नहीं होता।

मां के भक्तों की सेवा में जुटा रहा अब्दुल मन्नान का परिवार

जिला मुख्यालय पर प्रसिद्ध ‘दिल्ली चाट कॉर्नर’ के संचालक अब्दुल मन्नान ने नवरात्र के अवसर पर मां दुर्गा के भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन किया। सुबह लगभग 11 बजे शुरू हुआ यह भंडारा देर शाम तक अनवरत चलता रहा, जिसमें क्षेत्र के हज़ारों श्रद्धालुओं ने पहुंचकर प्रसाद ग्रहण किया।

इस दौरान अब्दुल मन्नान के परिवार के सदस्य तथा दुकान के कर्मचारी पूरे भक्ति व सेवा भाव से व्यवस्था संभालने में जुटे रहे। खुद अब्दुल मन्नान भी अपने हाथों से श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित करते दिखे। उनके इस सेवा भाव ने हर किसी का दिल जीत लिया और यह आयोजन पूरे क्षेत्र में चर्चा का केंद्र बना रहा।

कई वर्षों से निभा रहे हैं सेवा और भाईचारे की परंपरा

अब्दुल मन्नान केवल इस वर्ष ही नहीं, बल्कि पिछले कई वर्षों से लगातार नवरात्र के अवसर पर भंडारे का आयोजन करते आ रहे हैं। उन्होंने बताया कि इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य लोगों की निष्काम सेवा करना और समाज में आपसी भाईचारे की भावना को मज़बूत करना है।

उन्होंने भावुक होकर कहा, “जब तक मेरा जीवन रहेगा, मैं हर साल इसी तरह मां के भक्तों के लिए भंडारे का आयोजन करता रहूँगा।” उनका यह संकल्प दर्शाता है कि यह आयोजन केवल एक दिन का कार्यक्रम नहीं, बल्कि सामाजिक एकता और सद्भाव के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता है।

सिद्धार्थनगर से निकला सामाजिक सौहार्द का बड़ा संदेश

आज के दौर में जब कई बार छोटी-छोटी बातों पर समाज में दूरियाँ बढ़ाने की कोशिश की जाती है, ऐसे समय में अब्दुल मन्नान के परिवार की यह पहल आपसी विश्वास और ‘गंगा-जमुनी तहज़ीब’ को सुदृढ़ करती है। भंडारे में न केवल प्रसाद बंटा, बल्कि आपसी प्रेम, सम्मान और सहयोग का गहरा संदेश भी प्रसारित हुआ।

सिद्धार्थनगर से उठी यह पहल उन सभी लोगों के लिए एक मिसाल है जो समाज में शांति, एकता और भाईचारे को फलते-फूलते देखना चाहते हैं। यह स्पष्ट संदेश देता है कि व्यक्तिगत आस्था अपनी जगह है, लेकिन मानवता और प्रेम ही समाज को जोड़े रखने वाली सबसे बड़ी शक्ति हैं।