जज्बात में बहके कदम – शादी शुदा मर्द और शादी शुदा औरत की प्रेम कहानी निकाह के कुछ हफ्ते बाद ही अपने पुराने पति के पास वापस

सरकार के गलत फैसलों से हिन्दू मुस्लिम का विरोध बढ रहा है सरकार यदि हिन्दू और मुस्लिम समाज को स्पष्ट कानून जारी करदे कि हिन्दू समाज का कोई भी व्यक्ति मुस्लिम समाज की लड़कियों से शादी नहीं करेगा यदि ऐसा करता है तो सीधे तौर पर पांच वर्ष या दस वर्ष की सजा का प्रावधान हो और ठीक ऐसे ही यदि कोई मुस्लिम युवक किसी हिन्दू समाज की महिला से शादी करता है तो उसे भी सीधे तौर पर दस वर्ष की सजा का प्रावधान कर सीधा सदेश समाज में दिया जा सकता है |

लेकिन अगर ऐसा हो जाता है तो राजनीती की दुकानदारी बंद होने का खतरा है |

विनय त्रिपाठी

सिद्धार्थनगर – मिश्रौलिया थाना अंतर्गत एक गांव के दूसरे धर्म के एक शादीशुदा युवक ने यहां रहने वाली  एक दलित महिला से सोशल मीडिया प्लेटफार्म पर दोस्ती कर ली महिला भी पहले से शादीशुदा थी।

दोनो शादी शुदा का प्रेम परवान चढ़ा तो दोनो ने प्रदेश से बाहर शादी कर ली ।

घटना की सूचना जब महिला के पति को मिली तो वह पुलिस की मदद से पत्नी को वापस लाया और 5 लोगों के खिलाफ मामला भी दर्ज करवाया।

जबकि महिला पहले से शादी शुदा थी वह अपना फैसला कर पाने में कानूनी अधिकार रखती है बावजूद इसके मामले को धर्म परिवर्तन से जोड़कर महिला के पति ने तहरीर दी।

बहरहाल हमारा समाज शादी शुदा मर्द या शादी शुदा औरत को पति या पत्नी के रहते शादी करने की मान्यता नहीं देता है उन्हें भी अपनी सामाजिक जिम्मेदारियों को समझना चाहिए था। उनके इस कदम से कानूनी और समाजिक सदभाव और विश्वास को धक्का लगा है |