सिद्धार्थ नगर – अस्पतालों के बंद होने से स्वास्थ्य सेवाओं पर असर , क्या पैसे  देने के बाद ही मानक होंगे पूरे सी एम ओ महोदय , अभियान के दो महीने बाद भी विभाग कन्फर्म क्यों नहीं , कौन से अस्पताल बंद रहेंगे और कौन खुलेंगे  

एक महीने का नवीनीकरण का क्या मतलब है एफ आई आर की धमकी देकर कब तक चलेगा वसूली का धंधा

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सिद्धार्थनगर जिले में निजी अस्पतालों के नवीनीकरण संबंधी काम में विभागीय अधिकारियों द्वारा अवैध वसूली के वायरल वीडियोज ने सनसनी मचा दी है । पूरा मामला सिद्धार्थनगर जिले के बाँसी कस्बे के अवध हॉस्पिटल का है ।

अस्पताल के नवीनीकरण के लिए संचालक रंजीत सिंह cmo आफिस के चक्कर लगाते लगाते थकने के बाद मध्यस्थ डिप्टी सीएमओ वी एन चतुर्वेदी व नोडल अधिकारी के माध्यम से अपनी एम्बुलेंस बेचकर डेढ़ लाख रुपये दे दिए ।

जिससे एक महीने का नवीनीकरण किया गया। आगे के नवीनीकरण के लिए  अस्पताल संचालक से 5 लाख रुपये की डिमांड की जा रही थी । जिससे आज़िज आकर उन्होंने cmo office में नवीनीकरण के नाम पर चल रही अवैध वसूली के वीडियो बनाकर रिश्वतखोरी का पूरा सच खोलकर रख दिया।

पीड़ित का आरोप है कि 2022 अप्रैल माह में मेरे अस्पताल की रजिस्ट्रेशन तिथि खत्म हो रही थी जिसके रिन्यूवल के लिए मैंने cmo office में आवेदन किया । फिर मुझसे डिप्टी सीएमओ वी एन चतुर्वेदी ने डेढ़ लाख रुपये की मांग की फिर cmo के सामने रुपये लेकर एक माह की मान्यता दी। एक महीने के बाद फिर 5 लाख रुपये की डिमांड की जाने लगी,एफ आई आर की धमकी देने लगे। जिससे मैंने इनके वीडियो बनाकर वायरल कर दिया|

अस्पताल के पूरे दस्तावेज होने के बाद भी मुझसे रुपये की मांग रहे है । इस मामले की शिकायत विभाग के उच्चाधिकारियों से भी की है।

वही पूरे मामले को लेकर सीएमओ ने बताया कि मेरे से पैसे के लेनदेन की कोई बात नही हुई है। यह अवध हॉस्पिटल का प्रोप्राइटर रंजीत कुमार पिछले एक साल से अस्पताल के रजिस्ट्रेशन के लिए हाथ पांव मार रहा है।

जबकि उसका हॉस्पिटल एक साल पहले पूर्ववर्ती सीएमओ द्वारा सीज किया गया था वंहा अवैध रूप से अल्ट्रासाउंड चलता पाया गया था और मेरे कार्यकाल में एक साल से वह रजिस्ट्रेशन के लिए प्रयास कर रहा है।

मेरे द्वारा रजिस्ट्रेशन नही किया जा रहा है तो वह ट्रैप करने की कोशिश कर रहा है । जिससे वह मुझे ब्लैकमेल कर सके। बीते 10 दिनों से मुझसे कह रहा है कि मेरा रजिस्ट्रेशन कर दीजिए नही तो वीडियो वायरल कर दूंगा। लेकिन वंहा कोई चिकित्सक नही है बारबार कह रहा हूं कि चिकित्सक के बिना कैसे अस्पताल चल सकता है। वह केवल ब्लैकमेल करने की कोशिश कर रहा है, सच्चाई कुछ नही है।

बहरहाल मानक विहीन अस्पतालों के खिलाफ जो अभियान चलाने के बाद उनके डॉक्यूमेंट और अस्पताल की व्यवस्था जांचने के बाद विभाग द्वारा बंद अस्पतालों को चालू किये जाने के नाम पर अवैध वसूली क्यों जिन्हें बंद होना चाहिए उसे बंद कर दिया जाना चाहिए और जो खोलने के लायक हैं उन्हें in दो महीने के अन्दर खुल जाना चाहिए था लेकिन विभाग ऐसा न करके भरष्टाचार का खेल खेला जा रहा है |

बताते चलें की अभियान का सबसे ज्यादा असर इटवा विधान सभा में पड़ा है जहाँ एक दर्जन से अधिक अस्पताल महीनों से बंद पड़े हैं जिससे आम आदमी इलाज के नाम पर ज्यादा पैसा खर्च कर बहार जाने के लिए विवश है |