सिद्धार्थनगर – सी एच सी इटवा में स्वास्थ्य सेवा बेहाल लाखों की आबादी पर एक भी महिला डॉक्टर की तैनाती नहीं , हड्डीरोग, नेत्र रोग व बच्चों के चिकित्सक की कमी से जूझ रहा अस्पताल

kapilvastupost

महिलाओं को बेहतर इलाज मुहैया कराने का दावा इटवा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में बेदम साबित हो रहा है। लगभग ढ़ाई लाख की आबादी के इलाज के लिए बने अस्पताल में महिला चिकित्सक की तैनाती नहीं है।

जबकि यहां प्रतिमाह 250 से 300 नार्मल डिलिवरी होती है। वहीं गंभीर होने और ऑपरेशन की स्थिति आने पर जिला अस्पताल रेफर कर दिया जाता है।

इससे मरीजों को परेशानी होती है। साथ ही निजी अस्पताल में इलाज के लिए मोटी रकम खर्च

करना पड़ता है। चिकित्सक की तैनाती की कई बार मांग उठ चुकी है, लेकिन अभी तक कोई महिला डॉक्टर यहां नहीं तैनात की गई। इटवा तहसील क्षेत्र में एक बड़ी आबादी निवास करती है। लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मुहैया कराने के लिए इटवा में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बनाया गया।

अस्पताल तो बन गया पर महिलाओं की तरफ जरा भी ध्यान नहीं दिया गया। महिला डॉक्टर के न होने से महिलाएं भी अपनी परेशानी खुल कर बयां नहीं कर पाती हैं। यहां बलरामपुर जिले के पूरबी क्षेत्र व नेपाली सीमा के पास स्थित गांवों के अधिकांश मरीज आते हैं।

स्त्री रोग विशेषज्ञ न होने से एक बड़ी आबादी को 60 से 80 किमी की यात्रा करके दूरदराज अपना इलाज कराना पड़ रहा है। जिससे लोगों का पैसा और समय दोनों बर्बाद हो रहा है। इटवा सीएचसी में रोजाना लगभग 250 मरीज इलाज के लिए आते हैं।

इसमें महिलाओं की संख्या अधिक रहती है । इस संबंध में सीएचसी इटवा के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. संदीप द्विवेदी ने कहा कि हड्डी रोग, बच्चों व नेत्र रोगों सहित अन्य खाली पदों के लिए पत्राचार किया गया है।

उन्होंने कहा कि इसके बावजूद रोजाना उपलब्ध संसाधनों से मरीजों की हर संभव चिकित्सकीय सुविधा दी जा रही है।

आम जनता के बीच स्वस्थ्य सेवा को लेकर नाराजगी है यहां शीघ्र महिला रोग विशेषज्ञ की तैनाती होनी चाहिए। लोगों का कहना है कि यहां पर कई चिकित्सकों की कमी है। हड्डीरोग, नेत्र रोग व बच्चों के चिकित्सक नहीं है।

यही नहीं आधी आबादी के लिए किसी स्त्रीरोग विशेषज्ञ की तैनाती भी नहीं है | क्षेत्रीय जनप्रतिनिधियों ने जिला प्रशासन से डॉक्टरों के तैनाती समेत मूल भूत व्यवस्था को चाक चौबंद करने की मांग की है |