पिछड़े वर्ग के हक़ की अनदेखी? 25 वर्षों से एक ही ढर्रे पर आरक्षण व्यवस्था, ग्रामीणों ने उठाई आवाज़

Kapilvastupost

इटवा, सिद्धार्थ नगर।
पंचायत चुनाव को लेकर इटवा विकासखंड के ग्राम पंचायत सिसवा बुजुर्ग में जबरदस्त हलचल देखने को मिल रही है। सिसवा बुजुर्ग, पकरैला और सुहियां गांवों को मिलाकर गठित इस ग्राम पंचायत के सैकड़ों ग्रामीणों ने मिलकर जिला अधिकारी सिद्धार्थनगर और निर्वाचन आयोग लखनऊ को एक सामूहिक पत्र भेजा है। पत्र में पंचायत चुनाव में आरक्षण लागू किए जाने की मांग की गई है।

ग्रामीणों ने पत्र में गंभीर सवाल उठाए हैं
आख़िर क्यों पिछले 25 वर्षों से इस ग्राम पंचायत को केवल सामान्य वर्ग के लिए ही आरक्षित किया जाता है?
जबकि यहां पिछड़े वर्ग के मतदाताओं की संख्या सबसे अधिक है, तो क्या यह आरक्षण नीति की खुली अनदेखी नहीं है?
क्या यह लोकतंत्र के मूल सिद्धांतों—समानता और प्रतिनिधित्व—का हनन नहीं है?

आंकड़ों में झलकता असंतुलन

2021 की मतदाता सूची के अनुसार, ग्राम पंचायत सिसवा बुजुर्ग में कुल 1394 मतदाता हैं। इनमें:

391 सामान्य वर्ग के मतदाता (ब्राह्मण और मुस्लिम समुदाय)

98 अनुसूचित जाति के मतदाता (हरिजन व धोबी)

860 पिछड़ा वर्ग के मतदाता (तीनों गांव मिलाकर)

इन आंकड़ों से साफ़ है कि पिछड़ा वर्ग यहां का सबसे बड़ा मतदाता समूह है, इसके बावजूद उन्हें पिछले ढाई दशकों से प्रतिनिधित्व से वंचित रखा गया है।

आखिर क्यों हो रही अनदेखी?

ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि ग्राम पंचायत सिसवा बुजुर्ग में आरक्षण का निर्धारण पारदर्शी तरीके से नहीं हो रहा, जिससे सामाजिक न्याय की मूल भावना को ठेस पहुंच रही है। यह भी सवाल उठाया गया कि क्या चुनाव में केवल जनसंख्या का नहीं, बल्कि राजनीतिक दबावों का भी खेल चल रहा है?

ग्रामीणों की संयुक्त अपील

इस पत्र पर हस्ताक्षर करने वालों में प्रमुख रूप से जंगबहादुर चौधरी, सुरेश यादव, राम करन, शिवपूजन शर्मा, प्रवेश यादव, शैलेश यादव, प्रदीप चौधरी, नवीन कुमार, अमित कुमार, राकेश कुमार, रामप्रकाश, राधे मौर्य, राजेन्द्र विश्वकर्मा, सुरेश कुमार, गायत्री चौधरी जैसे दर्जनों नाम शामिल हैं।

इन सभी ने मांग की है कि 2025 के पंचायत चुनाव से पहले ग्राम पंचायत सिसवा बुजुर्ग का आरक्षण पुनः निर्धारित किया जाए, ताकि पिछड़े वर्ग के लोग भी अपनी लोकतांत्रिक भूमिका निभा सकें।