सिद्धार्थ नगर – रात में सोता है सिस्टम, जागते हैं खनन माफिया – मिट्टी लूट का ‘खौफनाक ट्रैक्टर राज’
📅 Published on: May 18, 2025
जंगबहादुर चौधरी
इटवा, सिद्धार्थनगर — जिले के खनन माफिया एक बार फिर प्रशासनिक ‘नींद’ का फायदा उठाकर सक्रिय हो गए हैं। खनन पर सख्त सरकारी रोक के बावजूद इटवा और कठेला समय माता थाना क्षेत्र के कई गांव—जैसे सुहिया, विशुनपुर, रसूलपुर, गौरा, मगुआ, कपियां आदि—रात होते ही मिट्टी खनन के केंद्र बन जाते हैं। दर्जनों ट्रैक्टर-ट्रालियां धड़ल्ले से खेत और तालाबों से मिट्टी उठाकर ले जाती हैं और प्रशासन आँखें मूँदे खड़ा है।
स्थानीय लोगों के मुताबिक ट्रालियों की रफ्तार इतनी तेज होती है कि कोई राहगीर चपेट में आ जाए तो जानमाल का गंभीर खतरा बना रहता है। लेकिन जिम्मेदार अधिकारी—चाहे वो थाना स्तर के हों या तहसील कार्यालय के—’खाऊ कमाऊ नीति’ के तहत चुप्पी साधे हुए हैं।
हर रात चलने वाले इस अवैध कारोबार ने न सिर्फ सरकारी आदेशों की धज्जियाँ उड़ाई हैं, बल्कि कानून-व्यवस्था को भी मजाक बना दिया है। यह स्थिति तब है जब खनन पर स्पष्ट प्रतिबंध है। सवाल ये उठता है कि क्या थाना और तहसील प्रशासन इस खुले लूट के खेल में हिस्सेदार बन चुके हैं?
प्रशासनिक मिलीभगत या सरकारी संरक्षण?
जिस तेजी और निडरता से मिट्टी खनन हो रहा है, उससे साफ है कि इसमें ऊपर से लेकर नीचे तक मिलीभगत है। ट्रैक्टरों की आवाजें रात के सन्नाटे में चीख-चीख कर बता रही हैं कि “सब सेट है”।
अब जनता पूछ रही है— कब जागेगा प्रशासन? क्या किसी हादसे के बाद होगी कार्रवाई? क्या खनन माफिया पर जिला प्रशासन का कोई डर बचा है?
यह मामला केवल अवैध खनन का नहीं, बल्कि प्रशासन की निष्क्रियता और भ्रष्ट व्यवस्था की पोल खोलने वाला है। ज़रूरत है उच्चाधिकारियों के संज्ञान की और तत्काल सख्त कार्रवाई की, वरना यह खामोशी एक दिन बड़ा विस्फोट बनकर सामने आएगी।


