बाणगंगा नदी में नहाते समय डूबे दो मासूम, सिद्धार्थनगर के बेलसड़ मोहल्ले से थे बच्चे

बाणगंगा नदी में दो बच्चों की डूबने से मौत, परिवार में मचा कोहराम , पूर्व में भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं, फिर भी कोई सबक नहीं लिया गया

kapilvastupost

सिद्धार्थनगर – जिले से एक बार फिर दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। मुख्यालय के बेलसड़ मोहल्ले के रहने वाले दो मासूम बच्चे शनिवार की दोपहर बाणगंगा नदी में नहाते समय डूब गए। घटना के बाद पूरे इलाके में मातम पसरा हुआ है, और प्रशासन की कार्यप्रणाली पर तीखे सवाल खड़े हो रहे हैं।

नदी में नहाते समय गहराई में समाए दो दोस्त

जानकारी के मुताबिक, तीन बच्चों का एक ग्रुप दोपहर लगभग ढाई बजे बाणगंगा बैराज की ओर घूमने गया था। मौज-मस्ती के बीच दो बच्चे—15 वर्षीय मो. आतिफ पुत्र मो हनीफ और 16 वर्षीय नूर आलम पुत्र अब्दुल करीम —नदी में नहाने उतर गए। देखते ही देखते वे गहराई में समा गए। तीसरे बच्चे ने जब देखा कि दोनों पानी से बाहर नहीं निकल रहे हैं, तो वह डर गया और घबराहट में घर भागकर परिजनों को सूचना दी।

परिवार की चीख-पुकार के बीच नदी किनारे जुटी भीड़

जैसे ही जानकारी परिवार तक पहुँची, बच्चों के बड़े भाई मो. आरिफ तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने खुद बच्चों की तलाश शुरू की और करीब चार बजे 112 पर कॉल करके पुलिस को जानकारी दी। इसके बाद मौके पर स्थानीय लोग भी जमा हो गए। मगर इस दौरान यह सवाल उठता रहा कि जब समय रहते सूचना दे दी गई थी, तो तत्काल बचाव कार्य क्यों शुरू नहीं किया गया और एन डी आर एफ टीम क्यों नहीं पहुंची ?

रात 12 बजे तक इंतजार, फिर भी नहीं मिला कोई सुराग

घटना की सूचना मिलने के बाद लगभग नौ बजे रात में एसडीएम शोहरतगढ़ और सीओ शोहरतगढ़ घटनास्थल पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि एनडीआरएफ गोरखपुर से संपर्क किया गया है और उनकी टीम रात लगभग 12 बजे के आसपास घटनास्थल पर पहुंचेगी। बचाव कार्य सुबह से शुरू किया जाएगा।

परिजन और स्थानीय लोग पूरी रात मौके पर डटे रहे। बाणगंगा नदी के किनारे मातम पसरा रहा और परिवार की चीखें हर किसी को झकझोर रही थीं।

पहले भी हो चुकी है ऐसी घटनाएं, फिर भी नहीं लिया गया सबक

यह पहली बार नहीं है जब बाणगंगा नदी मासूमों की जान निगल गई हो। 8 मार्च 2023 को भी सिद्धार्थ नगर के भीमापार मोहल्ले के रहने वाले तीन बच्चों की इसी नदी में डूबकर मौत हो गई थी। बावजूद इसके प्रशासन ने अब तक वहां कोई चेतावनी बोर्ड नहीं लगाया, न ही कोई सुरक्षा इंतजाम किए गए हैं। न कोई सुरक्षा गार्ड, न निगरानी और न ही घाटों पर कोई जिम्मेदार व्यक्ति की तैनाती।

प्रशासन की लापरवाही या सिस्टम की चूक?

हर साल की तरह इस बार भी हादसे के बाद ही प्रशासन हरकत में आया। लेकिन सवाल यह है कि ऐसी जानलेवा घटनाओं को रोकने के लिए समय रहते कदम क्यों नहीं उठाए जाते? आखिर कितनी जानें और जाएंगी, तब प्रशासन जागेगा?

स्थानीय लोगों में आक्रोश और भय का माहौल

बाणगंगा नदी पर हुए इस दर्दनाक हादसे के बाद स्थानीय लोग बेहद आक्रोशित हैं। नदी किनारे बिना किसी सुरक्षा के लोगों का आना-जाना हमेशा से खतरनाक रहा है। लोग पूछ रहे हैं कि जब प्रशासन को इस जगह की संवेदनशीलता का पता है, तो अब तक सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम क्यों नहीं किए गए?