📅 Published on: July 3, 2025
ढेबरूवा थाना – बाप को बच्चों के सामने पीट पीट कर मार डाला , छ बेटियां और एक बेटा हुए बेसहारा, पत्नी का मानसिक संतुलन बिगड़ा, धमकियों से सहमा परिवार
गुरु जी की कलम से
बढ़नी, सिद्धार्थनगर।
जिले की ढेबरुआ पुलिस पर एक बार फिर गंभीर सवाल उठ खड़े हुए हैं। पति की हत्या के बाद इंसाफ की आस में दर-दर भटक रही पीड़िता मीना को न तो थाने में न्याय मिला और न ही न्यायालय के आदेश का सम्मान। हैरानी की बात यह है कि मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट द्वारा स्पष्ट निर्देश देने के बावजूद अब तक आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज नहीं किया गया।
मामला ढेबरुआ थाना क्षेत्र का है। मीना के अनुसार, 5 दिसंबर 2024 की रात उसके पति राम अचल की उसके ही पटीदारों ने बेरहमी से पीट-पीटकर हत्या कर दी। आरोप है कि पहले घर में घुसकर लात-घूसों से हमला किया गया, फिर रास्ते में ईंट-पत्थर से वार कर जान ले ली गई। घटना के बाद से ही मीना थाने के चक्कर काट रही है, लेकिन पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने में दिलचस्पी नहीं दिखाई।
न्याय न मिलता देख मीना ने न्यायालय की शरण ली। 9 जून 2025 को मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने थाना प्रभारी ढेबरुआ को मामले की जांच कर एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया। आदेश में कहा गया कि विपक्षीगण के खिलाफ उचित धाराओं में मुकदमा पंजीकृत कर उसकी प्रति सात दिनों के भीतर न्यायालय में प्रस्तुत की जाए।
हालांकि, आदेश जारी हुए पंद्रह दिन से अधिक बीत चुके हैं, लेकिन ढेबरुआ पुलिस ने अभी तक एफआईआर दर्ज नहीं की। इस बीच, आरोपियों के हौसले बुलंद हैं और वे पीड़िता मीना व उसके मासूम बच्चों को जान से मारने की धमकियां दे रहे हैं। डर के साये में जी रही मीना अब गांव छोड़कर बढ़नी कस्बे में छिपकर रह रही है।
मीना ने रोते हुए कहा, “अगर पुलिस ने समय रहते कार्रवाई नहीं की, तो मेरे और मेरे बच्चों की भी हत्या कर दी जाएगी।”
पुलिस का पक्ष
इस संबंध में ढेबरुआ थाना प्रभारी गौरव सिंह ने बताया कि न्यायालय का आदेश मिल चुका है, जल्द ही एफआईआर दर्ज की जाएगी।
लेकिन बड़ा सवाल यह है कि आखिर न्यायालय के स्पष्ट आदेश के बावजूद पुलिस कार्रवाई में इतनी देरी क्यों कर रही है? क्या पुलिस की नजर में मजिस्ट्रेट का आदेश कोई मायने नहीं रखता? पीड़िता और उसके मासूम बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?