📅 Published on: June 3, 2026
निजाम अंसारी
सिद्धार्थनगर। उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर जनपद में भारत-नेपाल अंतर्राष्ट्रीय सीमा को जोड़ने वाली प्रस्तावित कॉरिडोर सड़क परियोजना विवादों में घिर गई है। नगर पंचायत कपिलवस्तु के बुद्धद्वार बर्डपुर तिराहे से लेकर नेपाल कपिलवस्तु अलीगढ़वा तक बनने वाली इस सड़क के सर्वे को लेकर स्थानीय ग्रामीणों और व्यापारियों ने गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
व्यापार संघ बर्डपुर सिद्धार्थनगर के अध्यक्ष राजकमल जायसवाल की अगुवाई में प्रभावित गांवों के सैकड़ों ग्रामीणों ने जिला प्रशासन (डीएम) को ज्ञापन सौंपकर पीडब्ल्यूडी (PWD) द्वारा कराए जा रहे सर्वे पर कड़ी आपत्ति जताई है और एकतरफा सर्वे का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच की मांग की है।
एकतरफा सर्वे का आरोप: ‘एक ही तरफ ली जा रही 21 मीटर जमीन’**
ग्रामीणों और व्यापार संघ के अध्यक्ष राजकमल जायसवाल का आरोप है कि सड़क चौड़ीकरण के लिए किए जा रहे सर्वे में संतुलित भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया का पालन नहीं किया जा रहा है। नियमानुसार सड़क की सेंटर लाइन से दोनों ओर समान दूरी पर भूमि अधिग्रहण होना चाहिए।
क्या है मुख्य आपत्ति?
वर्तमान सर्वे में लगभग छह किलोमीटर लंबे हिस्से में केवल एक ही ओर 21 मीटर तक की निशानदेही की जा रही है। इस एकतरफा रवैए के कारण स्थानीय बाजार, दुकानें और आवासीय भवन पूरी तरह उजाड़ने की कगार पर पहुंच गए हैं।
नहर की सरकारी भूमि का उपयोग करने का सुझाव**
ग्रामीणों ने प्रशासन को एक व्यावहारिक विकल्प भी सुझाया है। उनका कहना है कि सड़क के दूसरी ओर सिंचाई विभाग की एक पुरानी और अनुपयोगी नहर मौजूद है। यदि इस सरकारी भूमि का उपयोग सड़क निर्माण के लिए किया जाए, तो बड़ी संख्या में परिवारों को उजड़ने और विस्थापित होने से बचाया जा सकता है।
वैकल्पिक बाईपास न होने से आजीविका पर संकट**
ज्ञापन में इस बात का विशेष उल्लेख किया गया है कि घनी आबादी और स्थापित बाजार क्षेत्रों को बचाने के लिए प्रशासन द्वारा किसी भी वैकल्पिक बाईपास मार्ग की योजना नहीं बनाई गई है। इससे स्थानीय व्यापारियों और ग्रामीणों के सामने आजीविका का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। प्रभावित क्षेत्रों में बर्डपुर तिराहा बुद्ध द्वार, चैनपुर चौराहा, धर्मपुर, बिहरा, पचगवा, सिद्धार्थ विश्वविद्यालय कपिलवस्तु और अलीगढ़वा मार्ग के दोनों किनारे बसे सैकड़ों परिवार शामिल हैं।
हम विकास के विरोधी नहीं, लेकिन जनहित भी जरूरी’
ग्रामीणों ने साफ तौर पर कहा कि वे सरकार के विकास कार्यों के विरोधी नहीं हैं। वे चाहते हैं कि परियोजना का क्रियान्वयन इस प्रकार हो जिससे जनहित और विकास दोनों का संतुलन बना रहे।
ग्रामीणों की प्रमुख मांगें:
* वर्तमान में चल रहे सर्वे को तुरंत रोका जाए।
* पीडब्ल्यूडी, राजस्व और सिंचाई विभाग की संयुक्त टीम बनाकर दोबारा (पुनः) स्थलीय निरीक्षण कराया जाए।
* घनी आबादी को बचाने के लिए बाईपास निर्माण की संभावनाओं का बारीकी से परीक्षण किया जाए।