पीएम स्वनिधि ऋण में बैंक की मनमानी का आरोप, नगर पंचायत अध्यक्ष ने डीएम से की कड़ी कार्रवाई की मांग

लाभार्थियों को बार-बार दौड़ाने और ऋण के लिए परेशान करने की शिकायत, अध्यक्ष बोले—सरकारी योजना का लाभ दिलाने में लापरवाही बर्दाश्त नहीं

KAPILVASTUPOST 
बढ़नी बाजार, सिद्धार्थनगर। प्रधानमंत्री स्वनिधि योजना के तहत पटरी दुकानदारों एवं छोटे कारोबारियों को ऋण उपलब्ध कराने में बैंक स्तर पर कथित लापरवाही का मामला सामने आया है। नगर पंचायत बढ़नी बाजार के अध्यक्ष ने जिलाधिकारी को पत्र भेजकर पंजाब नेशनल बैंक, बढ़नी शाखा के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करते हुए पात्र लाभार्थियों को समय से ऋण उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक निर्देश जारी करने की मांग की है।

नगर पंचायत अध्यक्ष की ओर से 1 अक्टूबर 2026 को जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर को भेजे गए पत्र में कहा गया है कि नगर पंचायत की ओर से पीएम स्वनिधि योजना के लाभार्थियों की ऋण संबंधी पत्रावलियां पूर्ण कर पंजाब नेशनल बैंक की बढ़नी शाखा को भेजी जाती हैं। आरोप है कि बैंक कर्मचारियों द्वारा लाभार्थियों को बार-बार दौड़ाया जा रहा है, जिसके कारण उन्हें ऋण प्राप्त करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
बार-बार बैंक के चक्कर लगाने को मजबूर लाभार्थी
पत्र में कहा गया है कि कुछ वेंडर्स कथित तौर पर परेशान होकर ऋण लेने से ही मना कर रहे हैं। नगर पंचायत अध्यक्ष के अनुसार, इस संबंध में कई बार लाभार्थियों ने उनसे शिकायत की। शिकायत के बाद उन्होंने बैंक प्रबंधक से भी बातचीत की, लेकिन पत्र के मुताबिक बैंक प्रबंधक की ओर से यह कहा गया कि फिलहाल समय नहीं है।

नगर पंचायत अध्यक्ष ने पत्र में चिंता जताई कि ऐसी स्थिति में पात्र लाभार्थियों को पीएम स्वनिधि योजना का लाभ सुचारु रूप से नहीं मिल पा रहा है और इससे सरकार की योजना की छवि प्रभावित होने की आशंका है।
डीएम से हस्तक्षेप और कड़े निर्देश की मांग
नगर पंचायत अध्यक्ष ने जिलाधिकारी से पूरे मामले का संज्ञान लेते हुए संबंधित बैंक के विरुद्ध आवश्यक कार्रवाई करने तथा लाभार्थियों को समयबद्ध तरीके से ऋण वितरण सुनिश्चित कराने के लिए निर्देश जारी करने का अनुरोध किया है।
पत्र की प्रतिलिपि अपर जिलाधिकारी सिद्धार्थनगर, अग्रणी जिला प्रबंधक सिद्धार्थनगर और जिला नगरीय विकास अभिकरण (डूडा), सिद्धार्थनगर को भी भेजी गई है।

बताते चलें कि सरकारी योजनाओं का उद्देश्य जरूरतमंद छोटे दुकानदारों और कारोबारियों को आर्थिक सहारा देना है। ऐसे में यदि लाभार्थियों को ऋण के लिए बार-बार बैंक के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं, तो शिकायत की निष्पक्ष जांच और जिम्मेदारी तय होना जरूरी है। हालांकि बैंक की ओर से इस शिकायत पर आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी सामने नहीं आई है।