अव्यवस्था से जूझ रहे विद्यालय : सम्बद्ध करके चलाए जा रहे परिषदीय विद्यालय, अन्यथा सैकड़ों में लटकते ताले

निज़ाम अंसारी
सिद्धार्थनगर 03 मई। जिले में वर्षों से शिक्षकों के स्थानांतरण समायोजन और पदोन्नति न होने से सैकड़ों विद्यालय में स्थाई शिक्षक नही हैं। जनहित और छात्रहित को देखते हुए अधिकारी किसी न किसी विद्यालय के अध्यापक को सम्बद्ध करके संचालित करा रहे हैं। शत प्रतिशत नामांकन और नामांकन के बाद उन्हें बेहतर शिक्षा देने का प्रयास कर रहे हैं। पदोन्नति न होने से जिले के शिक्षकों के मध्य आक्रोश व्याप्त है।

शासन स्तर से संबद्धता पर भले ही रोक है, लेकिन उसके बाद यह भी फरमान है कि कोई विद्यालय बंद न रहे। अधिकारी उन्ही फरमान के मुताबिक जनहित और छात्रहित में बंद विद्यालयों को किसी न किसी अध्यापक को सम्बद्ध करके संचालित करा रहे हैं।


अगर देखा जाए तो अकेले विकास क्षेत्र बर्डपुर में डेढ़ दर्जन के करीब बंद विद्यालयों में पिछले कई वर्षों से दूसरे विद्यालय के अध्यापक संबद्ध होकर पढ़ा रहे हैं, और उनका वेतन उनके मूल विद्यालय से ही निकल रहा हैं।
प्रथिमक विद्यालय वजीराबाद से सहायक अध्यापिका रीता यादव अपनी बहन गीता यादव के यहां कंपोजिट विद्यालय मधुबेनिया में सम्बद्ध है।

प्राथमिक विद्यालय कलवारी की अध्यापिका दीपिका पाण्डेय कपिलवस्तु के शिक्षक चंचल भारती से शादी होने के बाद से ही अपने पति के विद्यालय कपिलवस्तु में सम्बद्ध हैं।

इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय नरकुल की अध्यापिका कल्पना के पति, पिछले साल एक युवती के साथ फरार हो गए, तभी से उनके जान के खतरे को देखते हुए उन्हें प्राथमिक विद्यालय रामजननगर में सम्बद्ध किया गया है।

इसी प्रकार प्राथमिक विद्यालय नोनहवा की अध्यापिका रुचि त्यागी से वही के एक शिक्षक से विवाद होने के कारण उनके जानमाल के खतरे को देखते हुए उन्हें भी बंद पूर्व माध्यमिक महदेवा में सम्बद्ध करके चार साल से चलाया जा रहा है।

इसी तरह बर्डपुर के पूर्व माध्यमिक विद्यालय रामनगर के अध्यापक मोहम्मद आजाद को बहोरवा, पिपरसन की अध्यापिका आरती सिंह को माजिगवा, प्राथमिक विद्यालय बनकटवा की मीनाक्षी को माधवनगर, बरदहवां की शिखा सचान को कन्या ककरहवा, भटौली के अंकित को भरवलिया, प्राथमिक विद्यालय जीतपुर के अमित श्रीवास्तव को पूर्व माध्यमिक विद्यालय जीतपुर, जमुहवां के प्रज्ञा को अगया खुर्द, बनौली आनंदापुर के राम सुमेर को पूर्व माध्यमिक विद्यालय रमजान नगर में सम्बद्ध करके चलाया जा रहा है।

बिना पदोन्नति के पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में पढ़ा रहे इन शिक्षकों के मध्य इस बात का आक्रोश है कि प्राथमिक विद्यालय के वेतनमान से जूनियर में काम लिया जा रहा है, यदि समय से पदोन्नति हुई होती तो अध्यापकों को सामाजिक और आर्थिक दोनो लाभ होता। संबद्धता के सहारे विद्यालय ही नही कार्यालय भी चल रहे हैं।

पूर्व माध्यमिक विद्यालय काशीपुर के अनुदेशक मधुकर मंजुल, और प्राथमिक विद्यालय बनरसिया के महेन्द्र कुमार कसौधन बीएसए कार्यालय में सम्बद्ध हैं। और वर्षों से काम कर रहे हैं।

जबसे विद्यालय कंपोजिट हुए तिलसड़ी, रामनगर, चक्ईजोत, नागचौरी, जमुन्हवां बंगाई के पूर्व माध्यमिक विद्यालयों को वहां के प्राथमिक विद्यालय के अध्यापक चला रहे हैं। अभी तक कोई स्थाई शिक्षक नही है, अगर सम्बद्ध करके विद्यालय को न संचालित किया जाता तो अकेले बर्डपुर ब्लॉक के डेढ़ दर्जन के करीब विद्यालयों में अबतक ताले लटकते हुए नजर आते।, और गांव के गरीब मजदूर, किसान के बेटे प्राइवेट में महंगी शिक्षा का भार न उठा पाने के कारण शिक्षा से वंचित रह जाते।

अकेले बर्डपुर ही नही जिले के भनवापुर, नौगढ़, बढ़नी, मिठवल, लोटन आदि ब्लॉक में देखा जाए तो सैकड़ों बंद पूर्व माध्यमिक विद्यालयों में स्थायी शिक्षक न होने की वजह से दूसरे विद्यालय के अध्यापकों से संचालित कराए जा रहे हैं। इस प्रकार देखा जाए तो जिले की शिक्षा व्यवस्था में सम्बद्ध शिक्षकों का बहुत ही बड़ा योगदान है।

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